सुलग रहा है पंजाब (अंक 44)
Jun 11th, 2007 by admin
दल खालसा को पुनर्जीवित कर गतिविधियां बढ़ाने के प्रयास
चंडीगढ़। पंजाब में आतंकवाद के दौरान प्रतिबंधित किए गए दल खालसा संगठन ने इस बार सिख धर्म की रक्षा का नए सिरे से बीड़ा उठा लिया है। इस बार दल खालसा ने कानून के दायरे के भीतर काम करने और एके-47 के बजाय कृपाण उठाने का फैसला लिया है। एक समय पृथक खालिस्तान की मांग का समर्थन करने वाले दल खालसा ने इस बार केवल सिख धर्म की रक्षा करने और सिख पंथ के रास्ते से भटक गए नौजवानों को दुबारा से सिख धर्म के मार्ग पर लाने का प्रण किया है। दरअसल सरकार की गलत नीति, दूसरे राज्यों के प्रवासी नागरिकों के पंजाब में आकर बस जाने और स्थानीय लोगों का रोजगार छीन लिए जाने व अन्य कारणों की वजह से सिखों में पनपने असंतोष के मद्देनजर दल खालसा को पुनर्जीवित किया गया है। पंजाब के गुप्तचर विभाग के अनुसार पंजाब में आतंकवाद का दौर थम जाने से हताश अलगाववादी तत्व व आतंकवादी संगठन के मुखिया पंजाब में सिख समुदाय में पैदा हुए असंतोष का फायदा उठाते हुए एक बार फिर से सक्रिय होने की फिराक में हैं। उन पर पाकिस्तान की कुख्यात जासूसी संस्था आई.एस.आई. की ओर से पंजाब में नए सिरे से हिंसा का तांडव शुरु करने के लिए जबरदस्त दबाव बनाया जा रहा है। डेरा सच्चा सौदा प्रकरण को लेकर पंजाब के माहौल में पैदा हुई गर्मी को इसी की एक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि अभी तक आतंकवादी संगठनों ने अपने को प्रत्यक्ष रूप से इस मामले से अलग रखा है। फिर भी ऐसे संकेत मिले हैं जिनसे पता चलता है कि पाकिस्तान में आई.एस.आई. की मेहमाननवाजी का आनंद उठा रहे आतंकवादी संगठनों के नेताओं ने डेरा प्रकरण के बाद भड़के शोलों को हवा देने का काम किया है।दल खालसा को मजबूती प्रदान करने और सिखों में उसका डर बढ़ाने के मकसद से इसके उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालने वाले उपाध्यक्ष स. जगजीत सिंह ढिल्लो ने ‘अपनी दिल्ली’ को विशेष भेंट में बताया कि प्रवासी नागरिक खासकर बिहार व पूर्वी उत्तर के निवासियों के स्थायी रूप से पंजाब में आकर बस जाने की वजह से वहां का सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक ताना-बाना पूरी तरह से छिन्न-भिन्न हो गया। जिसकी वजह से सिखों की अपनी पहचान खतरे में पड़ गई है। उन्होंने बताया कि सरकारी आकड़ों के अनुसार बिहार व पूर्वी उत्तर प्रदेश के लगभग 32 लाख प्रवासी नागरिक स्थायी रूप से पंजाब में आकर बस गए हैं। इन लोगों की वार्षिक आय 35 सौ करोड़ रुपए के आंकड़े को भी पार कर गई है। बावजूद इसके इनका पंजाब की उन्नति में कोई योगदान नहीं है। क्योंकि यह अपनी आमदनी का दो तिहाई हिस्सा अपने मूल राज्य को भेज देते हैं। उन्होंने बताया कि इन प्रवासी नागरिकों के कारण पंजाब के नौजवानों के लिए रोजगार के अवसर निरंतर कम होते जा रहे हैं। उनके अनुसार बिहार व पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग बड़ी संख्या में खेतिहर मजदूर के रूप में काम कर रहे हैं। ये लोग न केवल बहुत ही कम मजदूरी पर खेतों में काम करने के लिए तैयार हो जाते हैं। बल्कि वह अन्य सुविधाओं की मांग भी नहीं करते हैं। जिसकी वजह से स्थानीय मजदूरों को लाभ मिलना लगभग बंद हो गया है। ऐसे में भूमिहीन खेतिहर मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। स. ढि़ल्लो के अनुसार बिहार व पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों के पंजाब में बढ़ते वर्चस्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पंचकुला के आसपास की 12 पंचायतों में से 10 के सरपंच पर बिहार से आए प्रवासी काबिज हैं। श्री ढिल्लो के अनुसार प्रवासी नागरिकों के कारण पंजाब ने सामाजिक बुराइयां भी घर करती जा रही हैं। बिहारी व पूर्वी उत्तर प्रदेश के नागरिकों की देखादेखी सिख युवको में तंबाकू की वस्तुओं का सेवन करने की आदत बढ़ती जा रही है। इसके अलावा प्रवासी नागरिकों के प्रेमजाल में फंसकर लड़कियों के पंजाब से बिहार व पूर्वी उत्तर-प्रदेश के राज्यों में भाग कर जाने की घटनाएं काफी बढ़ गई हैं।
उन्होंने बताया कि सिख रोटी के संकट का तो सामना कर सकते हैं मगर बेटियों के घर से भाग कर शादी कर लेने के कारण उनके आत्म-सミमान को जो चोट लगती है वह असहनीय है। पंजाब पुलिस के आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि पिछले दो वर्षों के दौरान पंजाब के गांवों व कस्बे से जवान लड़कियों के गायब होने की घटनाएं काफी बढ़ गई हैं।
जब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि राज्य के गांवों में हर महीने एक -दो युवक युवतियों की लाशें मिलने का सिलसिला पिछले कुछ समय से जारी है। उन्होंने बताया कि जिन लोगों की लड़कियां घर से भाग कर शादी कर रही है उनके घरवाले उन्हें दूसरे राज्यों से ढूंढकर बहला-फुसलाकर घर लौटने के लिए राजी कर लेते हैं। घर लौटते ही बेटी व दामाद की जिंदगी खत्म कर दी जाती है। ऐसे मामलों में गांव वाले व स्थानीय पुलिस भी खामोशी अख्तियार किए रहती है। जिसकी वजह से किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पाती है। जगजीत सिंह ढिल्लो के अनुसार सिख नौजवान फैशन की वजह से दाढ़ी व केश कटवा रहे हैं। दरअसल आज पंजाबी पॉप गायक उनके आदर्श बन गए हैं। जिनका अनुसरण करते हुए वह दाढ़ी व केश रखने से परहेज करने लगे हैं। इसकी वजह से भी सिखों के सामने पहचान का संकट पैदा होता जा रहा है। इसके मद्देनजर दल खालसा युवकों को सिक्खी के नियमों का पालन करते हुए दाढ़ी व केश रखने के लिए प्रेरित कर रहा है। उन्होंने बताया कि अप्रवासी भारतीयों ने भी पंजाब को केवल पैसा कमाने का साधन समझ लिया है। वह यहां के विकास में योगदान देने व रोजगार के अवसर बढ़ाने के बजाय सस्ते दामों पर जमीन खरीद कर उस पर महंगे माल बनाने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को उन्हीं अप्रवासी भारतीयों को पंजाब में जमीन खरीदने की अनुमति देनी चाहिए जो कृषि उत्पाद या बड़े उद्योग लगाने के लिए जमीन प्राप्त करना चाहते हैं।
सरकार ने अगर समय रहते पंजाब के सिखों में पनपते असंतोष को कम करने की दिशा में प्रभावी कदम न उठाए तो दल खालसा की तरह ही दूसरे दल भी फिर से सक्रिय होकर पृथक खालिस्तान की मांग को लेकर फिर से अपनी गतिविधियां तेज कर सकते हैं।