सैनिकों पर विष कन्याओं का कहर (अंक 45)
Jun 18th, 2007 by admin
नई दिल्ली। कश्मीर घाटी और पूर्वोत्तर राज्यों में विषम परिस्थितियों में आतंकवादी संगठनों के अति-आधुनिक हथियारों का सामना कर रहे भारतीय सशस्त्र बलों पर विष कन्याओं का कहर टूट रहा है। इन विष कन्याओं के संपर्क में आने वाले सैनिक जवान जानलेवा बीमारी की चपेट में आकर असमय काल के गाल में समा रहे हैं। इतना ही नहीं एड्स ग्रस्त सैनिकों के जरिए यह भयानक बीमारी उनकी पत्नियों में भी फैल रही है। सशस्त्र बलों के जवानों में एड्स फैलने के बढ़ते मामलों से केंद्रीय गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय चिंतित तो हैं मगर उसने इस मामलों पर पर्दा डालने के बजाय इस समस्या से निपटने के लिए कारगर कदम उठाने का फैसला लिया है। गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार शुरू में सेना की बदनामी होने के डर से ऐसे मामलों को छुपाने की रणनीति अपनाई गई थी। जिसके परिणामस्वरूप एड्स की चपेट में आने वाले सैनिकों की संख्या बढ़ती गई। आज यह स्थिति खतरनाक सीमा को पार कर चुकी है। इस स्थिति को देखते हुए ही रक्षा मंत्रालय ने सेना मुख्यालय को निर्देश दिया है कि कश्मीर व पूर्वोत्तर राज्यों में तैनात सैनिकों के छुट्टी पर जाने के आवेदन को तुरंत स्वीकार कर लिया जाए। ताकि वह अपने परिवार के साथ समय बिता सकें। इससे उनके कुंठित होने और विष कन्याओं के पाश में फंसने की आशंकाएं कम हो जाएंगी। गृहमंत्रालय और रक्षा मंत्रालय दोनों को ही इस बात की सूचनाएं मिली हैं कि कश्मीर घाटी और पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय आतंकवादी संगठनों ने बड़ी संख्या में सुंदर युवतियों को अपने संगठन में शामिल कर लिया है। इन युवतियों को विष कन्या के रूप में काम करने के लिए आतंकवादी संगठनों ने इन्हें धमकी देने के अलावा इनका ब्रेन वाश भी किया है। इनमें से अधिकांश युवतियों को आतंकवादी संगठनों के सदस्यों से ही एड्स की बीमारी मिली है जिसे वह अपने संपर्क में आने वाले सैनिक जवानों में बांट रही हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कश्मीर घाटी व पूर्वोत्तर राज्यों में आतंकवादी संगठनों के लिए काम कर रही ये विष कन्याएं बला की खूबसूरत हैं। दरअसल आतंकवादी संगठन में शामिल होने और उसके लिए काम करने की योग्यता के लिए खूबसूरती ही सबसे बड़ा पैमाना है। ये युवतियां अपने रूप के जाल मे फंसाकर सैनिक अधिकारी व जवानों से महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कर उसे अपने संगठनों तक पहुंचाती हैं। यही कारण है कि सशस्त्र बलों की कार्रवाई की पहले से ही जानकारी मिल जाने की वजह से अकसर आतंकवादी बच निकलने में कामयाब हो जाते हैं। ये युवतियां सैन्य अधिकारी व जवानों को शारीरिक संबंध बनाने के लिए भी उकसाती हैं और उन्हें एड्स की बीमारी उपहार में दे देती हैं। रक्षा मंत्रालय केञ् सूत्रों के मुताबिक भारतीय सैनिकों में एड्स का मामला सबसे पहले 1992 में प्रकाश में आया था तब संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के मिशन पर गए एक सैनिक के एड्स से ग्रसित होने की बात सामने आयी थी। मगर सैन्य अधिकारियों ने एड्स मामले की व्यापक जांच कराने के बदले उसे दबा दिया। उसके बाद से सैनिकों के एड्स की चपेट में आने वाले मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सेना मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार इस वक्त तक सेना के 0.028 प्रतिशत जवान एड्स की चपेट में आ चुके हैं। एड्स ग्रस्त सैनिकों की वास्तविक संख्या इससे भी अधिक हैं। सन 2004 में ऐसे 104 जवानों को सेना से निकाल दिया गया था, जिन्हें एड्स था। सशस्त्र बल चिकित्सा निदेशालय ने हाल ही में रक्षा मंत्रालय व सेना मुख्यालय को भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सैनिकों में एड्स फैलने का कारण एड्स ग्रस्त महिलाओं के साथ शारीरिक संबंध बनाना है नशे के लिए संक्रमित सुई का प्रयोग करने की वजह से उनके एड्स की चपेट में आने या संक्रमित रक्त चढ़ाने की वजह से इस जानलेवा रोग का शिकार हो जाने की संभावनाएं कम हैं। रक्षा मंत्रालय और सेना मुख्यालय दोनों का ही मानना है कि सैनिकों में एड्स के मामलों का बढऩा वास्तव में चिंता का विषय है। इस संबंध में सैनिकों में इससे बचाव के प्रति जागरूकता फैलने के साथ ही उनकी सेवा शर्तों में सुधार करने खासकर उन्हें लंबी छुट्टी देने की नीति को उदार बनाने की आवश्यकता है।