शीला व हारुन में ठनी (अंक 48)
Jul 10th, 2007 by admin
नई दिल्ली। राजधानी की सड़कों से किलर ब्ल्यू बसों को हटाने के मामलें को लेकर मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और उनके परिवहन मंत्री हारुन युसूफ के बीच ठन गई है। दिल्ली की सड़कों पर ब्ल्यू लाइन बसों के कहर के कारण यकायक दुर्घटना व उससे होने वाली मौतों की वजह से मची हाय-तौबा को शांत करने की मंशा से मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने चरणबद्घ तराके से इन बसों को हटाने का एलान किया था।
इस घोषणा के मात्र 24 घंटे के भीतर ही परिवहन मंत्री हारुन युसूफ ने कहा कि ब्ल्यू लाइन बसों को हटाने में कम से कम तीन साल का समय लगेगा। उनके मुताबिक सैंकड़ों बसों के परमिट 2012 तक वैध हैं।
एक ही मुद्दे पर मुख्मंत्री व परिवहन मंत्री के अलग-अलग ‘स्टैंड’ लेने की वजह परिवहन विभाग के अधिकारी पेशोपेश में पड़ गए हैं। उन्हें लगता है कि अगर मुख्यमंत्री की इच्छानुसार वह ब्ल्यू लाइन बसों पर लगाम कसने के संबंध में सख्त कदम उठाते हैं तो इससे परिवहन मंत्री नाराज हो सकते हैं। अगर परिवहन मंत्री की मंशा भांपते हुए जैसा चल रहा है वैसा चलते देने की नीति का अनुसरण करते हैं तो शीला दीक्षित के कोप का भाजन बनना पड़ सकता है।
वैसे ब्ल्यू लाइन बसों को हटाने के मामले में मुख्यमंत्री व परिवहन मंत्री के अलग-अलग स्टैंड के कारण दिल्ली सरकार के खुश होने वाले अधिकारियों की संख्या भी कम नहीं है। इनमें वह अधिकारी शामिल हैं जिनकी खुद की बेनामी ब्ल्यू लाइन बसें चल रही हैं या फिर जो ऐसी बसों के ऑपरेटर को संरक्षण देते आ रहे हैं। इन अधिकारियों की वजह से ब्ल्यू लाइन बसों के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियान टांय-टांय फिस्स हो जाते हैं। इस माह के पहले सप्ताह में ब्ल्यू लाइन बसों के कारण सड़कों पर होने वाली दुर्घटना व मौतों की संख्या यकायक काफी बढ़ गई थी। जिसकी वजह से मीडिया ने तूफान खड़ा कर दिया था। स्थिति को भांपते हुए मुख्यमंत्री ने आनन-फानन में ब्ल्यू लाइन बसों को हटाने का फैसला लेने की घोषणा कर दी। यह घोषणा करते समय उन्होंने परिवहन विभाग से ब्ल्यू लाइन बसों को परमिट की वैधता की अवधि और बसों को हटाने के संबंध में आने वाली कठिनाइयों की वास्तविकता के बारे में जानकारी तक हासिल नहीं की। ऐसा लगता है कि उनका एममात्र मकसद ब्ल्यू लाइन बसों के खिलाफ उपजे जनाक्रोश की आग पर ऐसी घोषणा कर पानी डालना था।
मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद ब्ल्यू लाइन बस ऑपरेटर की ऐसोसिएशन के पदाधिकारी व बड़े ऑपरेटर ने परिवहन मंत्री हारुन युसूफ से मुलाकात कर उन्हें अपनी समस्याओ से अवगत कराया। उनकी बातें सुनने के बाद हारुन युसूफ ने उन्हें भरोसा दिलाया कि परमिट की अवधि पूरा होने तक बिना वजह किसी भी बस के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि डीटीसी के बेड़े में बसों की भारी कमी को पूरा किए बिना सरकार ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाएगी जिससे नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़े।
ब्ल्यू लाइन बसों के बारे में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के स्टैंड से एकदम विपरीत रुख अख्तियार करने के बारे में हारुन युसूफ का कहना है कि उन्होंने तो वास्तविकता स्थिति बयां की है। उनके मुताबिक जिन बसों के परमिट अभी तीन साल तक वैध हैं उन्हें भला कैसे हटाया जा सकता है। अगर सरकार ऐसी बसों के परमिट जबरन रद्द करने की प्रक्रिया अपनाएगी तो बस ऑपरेटर अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। अदालती फैसला उनके हक में आने पर सरकार की किरकिरी होगी। उनका कहना है कि ब्ल्यू लाइन बसों की समस्या से निजात पाने के दो ही रास्ते हैं। पहला है परमिट की अवधि समाप्त होने पर उसका नवीनीकरण न किया जाए। दूसरे डीटीसी बेड़े की बसों की संख्या बढ़ाकर लोगों को वैकल्पिक बस सेवा मुहैया कराई जाए।
परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार हाल ही में सरकार ने ब्ल्यू लाइन बसों का परमिट पांच वर्ष की अवधि के लिए जारी करने का फैसला लिया था। इस फैसले के अनुसार सैंकड़ों बसों के परमिट 2012 तक वैध है। ऐसे में इन बसों को इस अवधि से पहले सड़क से हटाने की संभावना न केञ् बराबर है।