पहुंच की बलि चढ़ा एक और आईएएस अधिकारी (अंक 17)
Dec 3rd, 2007 by admin
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने मुचय सचिव के रूप में 1975 बैच के आईएएस अधिकारी राकेश मेहता को आसीन कराया है मगर उनकी यह नियुक्ति एक बार फिर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी किरण बेदी की कहानी को दोहराती है। श्रीमती बेदी भी पहुंच का शिकार हुईं और उन्हें दिल्ली पुलिस कमिश्नर का पद नहीं दिया गया। उनकी जगह पर उनसे करीब वर्ष भर जूनीयर आईपीएस अधिकारी वाई.एस. डडवाल को दिल्ली पुलिस की कमान सौंप दी गई। ठीक उसी प्रकार राकेश मेहता से सीनियर निगमायुक्त अशोक कुमार निगम की वरीयता को दरकिनार कर राकेश मेहता को दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव बना दिया गया है। श्री निगम 1974 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।
कायदे के अनुसार श्री निगम को राकेश मेहता से पहले इस पद पर आसीन किया जाना चाहिए था। मगर दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित तक पहुंच नहीं होने के कारण श्री निगम को निगमायुक्त ही रहने दिया गया। वैसे भी यह माना जाता है कि श्री मेहता वर्षों से ही मुख्यमंत्री के चहेते अधिकारियों में शीर्ष पर हैं। इसका उदाहरण यह है कि यदि वे मुख्यमंत्री के चहेते नहीं होते तो दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के चेयरमैन से लेकर मुख्य सचिव तक का सफर महज सात सालों में पूरा नहीं कर लेते। जहां तक सरकार में पदोन्नति का सवाल है तो श्री निगम ही अकेले एक ऐसे अधिकारी नहीं है जिन्हें सरकारी उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है।
राकेश मेहता जैसे अनेक ऐसे चहेते अधिकारी हैं जो किसी मुख्यमंत्री अथवा मंत्री का चहेता बनकर शॉटकट पदोन्नति पाने में सफलता हासिल कर चुके हैं। यह बात दीगर है कि किरण बेदी और अशोक निगम जैसे ईमानदार अधिकारी विरले ही होते हैं जो पदोन्नति की बाट जोहते जोहते सरकारी सेवा के अंतिम पड़ाव तक पहुंच जाते हैं।
अकेले यदि राकेश मेहता की तरक्की की ही बात की जाए तो इन्होंने महज सात सालों में सात विभिन्न विभागों में अहम पदों पर आसीन होकर तरक्कियां पाई हैं।
इन विभागों में डीटीसी के अलावा दिल्ली नगर निगम का आयुक्त पद, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव का पद, ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव का पद, स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव का पद शामिल है। दिल्ली सरकार का मुख्य सचिव बनना श्री मेहता के लिए सात सालों में छठी पदोन्नति है।
जबकि इस कार्यकाल का आकलन दूसरे आईएएस अधिकारियों के कार्यकाल से किया जाए तो कई ऐसे अधिकारी निकल आएंगे जो अभी भी एक विभाग के एक ही पद पर बैठे हुए पदोन्नति पाने की बाट जोह रहे हैं। इसका मतलब साफ है कि सरकार में जो अधिकारी जिसका जितना अधिक चहेता रहेगा उसकी उतनी ही अधिक पदोन्नति होगी।