किराएदारों की पहचान अधर में …! (अंक 22)
Jan 21st, 2008 by admin
नई दिल्ली। आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने वाले आपराधिक प्रवृति के लोगों की पहचान के लिए करीब सात साल पहले दिल्ली पुलिस ने राजधानी में रहने वाले किराएदारों की पहचान के लिए एक योजना तैयार की थी। जिसके तहत किराए के मकान में रहने वालों को हर कीमत पर अपनी पहचान के लिए स्थानीय थाने में हलफनामा देना आवश्यक है।
मजे की बात यह है कि अभी पुलिस इस योजना को पूरी तरह अमलीजामा पहना भी नहीं सकी है कि दिल्ली के उपराज्यपाल ने पुलिस वालों की एक और मुसीबत बढ़ा दी है। यह बात दीगर है कि किराएदारों की पहचान के नाम पर दिल्ली पुलिस यदा-कदा एक अभियान चलाने का दावा करती है मगर समय बीतने के साथ ही यह अभियान भी रूई मिठाई की तरह हवा हो जाता है। इस कारण अब दिल्ली वालों के मन में यह आशंका भी उत्पन्न होने लगी है कि सुरक्षा कारणों से आगामी 15 जनवरी से दिल्ली में लागू होने वाली पहचान पत्र रखने की योजना का हश्र भी कहीं किराएदारों के पहचान अभियान की तरह न हो जाए।
गौरतलब है कि वर्ष 2000 के दिसम्बर माह में आतंकियों ने लाल किला गोली कांड को अंजाम दिया था। उसी समय दिल्ली पुलिस ने आतंकवादियों की पहचान के लिए किराएदारों की पहचान का अभियान आरंभ किया था। घटना ताजी होने के कारण दिल्ली पुलिस कर्मी तत्काल इस अभियान को चलाने में तो जीतोड़ कोशिश की मगर समय बीतने के साथ यह अभियान भी अन्य सरकारी अभियानों की तरह गुमनाम हो गया। अब भी स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस के अवसर पर आतंकी हमलों के मद्देनजर दिल्ली पुलिस यदा-कदा इस अभियान को चलाती है मगर कुछ समय बाद ही किराएदारों की पहचान की प्रक्रिया बंद हो जाती है। अब जबकि दिल्ली के उपराज्यपाल ने दिल्ली को देश की सुरक्षित राजधानी बनाने के उद्देश्य से यहां के निवासियों के पास उनका पहचान पत्र होने के नियम लागू करने की योजना बनाई है और इसकी जिम्मेवारी दिल्ली पुलिस के कंधों पर दी है तो लोगों को एक बार फिर इस योजना के क्रियान्वयन को लेकर आशंका उत्पन्न हो रही है।