बिजली कंपनियों बन रही हैं ईस्ट इंडिया कंपनी (अंक 29)
Feb 25th, 2008 by admin
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में बिजली के वितरण में लगी निजी बिजली कंपनियों ने अब अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह काम करना आरंभ कर दिया है। इन कंपनियों ने बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक फरमान जारी किया है कि जिस किसी भी उपभोक्ता को चौबीसों घंटे बिना किसी कटौती के बिजली चाहिए वह सरकार द्वारा निर्धारित बिजली की दरों से अतिरिक्त 50 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से बिल का भुगतान करे तो उसे निर्बाध रूप से बिजली प्रदान की जा सकती है। अभी तो इस स्कीम के तहत बिजली वितरण करने वाली कंपनी नॉर्थ दिल्ली पावर लिमिटेड (एनडीपीएल) और कोका कोला कंपनी की सिस्टर कनसर्न कंपनी पर्ल ड्रिंक के साथ समझौता हुआ है। इस नए समझौते के तहत एनडीपीएल पर्ल ड्रिंक को 24 घंटे बिजली की आपूर्ति करेगी। इसके बदले में उक्त कंपनी को सरकार द्वारा औद्योगिक इकाइयों के लिए निर्धारित दर से भ् पैसे प्रति यूनिट अधिक का बिल देना होगा।
हालांकि बिजली कंपनियां अधिक कमाई करने के लिए भी यह फार्मूला औद्योगिक इकाइयों पर लागू कर रही हैं। मगर बताया यह भी जा रहा है कि यदि रिहायशी इलाकों के लोग आपस में एक ग्रुप बनाकर उद्यमियों की तरह बिजली बिल का अतिरिक्त भुगतान करने की हामी भरें तो भविष्य में यह योजना आम उपभोक्ताओं के लिए भी लागू की जाएगी।
एनडीपीएल के प्रवक्ता अजय महाराज का कहना है कि कोका कोला की सिस्टर कनसर्न कंपनी पर्ल ड्रींक्स की ओर से 24 घंटे बिजली की आपूर्ति करने की बात कही गई थी। इस बाबत उनकी ओर से जब उक्त दरों का जिक्र किया गया तो उन्होंने इस बात को स्वीकार कर लिया।
उनका यह भी कहना है कि इस कंपनी को पांच मिनट की भी कटौती होने पर लाखों का नुकसान हो रहा था। क्योंकि उन्हें जेनरेटर के माध्यम से एक यूनिट बिजली प्राप्त करने के लिए दस से भ् रुपये अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा था। ऐसे में यदि उन्हें 50 पैसे अधिक दर पर प्रति यूनिट बिजली 24 घंटे उपलब्ध करायी जाती है तो इसमें उन्हें दिक्कत नहीं है। श्री महाराज ने यह भी बताया कि इस तरह की स्कीम पर अभी पर्ल ड्रिंक्स के साथ में ही समझौता हुआ है। मगर यदि अन्य उद्यमी भी इस स्कीम के तहत अतिरिक्त भुगतान करके 24 घंटे बिजली की मांग करते हैं तो इसमें उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं है।
मजे की बात यह भी है कि एनडीपीएल ने भ् पैसे प्रति यूनिट अतिरिक्त भुगतान करके 24 घंटे बिजली की आपूर्ति करने के इस फार्मूले पर काम करना आरंभ तो कर दिया है, मगर अभी उसे दिल्ली राज्य विद्युत विनियामक आयोग की ओर से इस स्कीम की मंजूरी नहीं मिली है।
इस संदर्भ में निजी कंपनियों को बिजली की आपूर्ति करने वाली कंपनी दिल्ली ट्रांस्को के प्रवक्ता ऋषीराज का कहना है कि ये निजी कंपनियां मनमाने तरीके से उपभोक्ताओं से अधिक कमाई करने के लिए नित्य नई-नई स्कीम लाने की घोषणा करती हैं।
लेकिन जब तक उन स्कीमों को लागू करने की मंजूरी विनियामक आयोग की ओर से नहीं मिलती है तब तक इन कंपनियों की सारी कवायद बेकार है। उनका यह भी कहना है कि यदि एनडीपीएल ने कोका कोला की सिस्टर कनसर्न कंपनी पर्ल ड्रिंक्स के साथ किसी प्रकार का समझौता किया है तो यह उसकी मनमानी है। इसके लिए पहले उसे विद्युत विनियामक आयोग से स्वीकृति लेना आवश्यक है।
गौरतलब है कि सन् 1772 में जब अंग्रेजों ने कोलकाता में ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की थी तब उन्होंने सबसे पहले अपना कब्जा यहां के व्यापारियों पर जमाया था। इसके बाद उन्होंने पूरे देश की जनता पर अपना अधिकार जमा लिया था। ठीक उसी प्रकार बिजली कंपनियां भी दिल्ली के उपभोक्ताओं पर दरों में इजाफा करने के लिए पहले तो सरकार पर दबाव बना रही थीं। लेकिन जब यहां के उपभोक्ताओं और विपक्षी दलों के भारी विरोध के बाद सरकार और इन कंपनियों की एक न चली तो उन्होंने बिजली की दरें बढ़ाने का एक नया रास्ता अतिरिक्त किया है।
इस नई स्कीम के माध्यम से पहले तो वह दिल्ली के उद्यमियों को सरकार द्वारा निर्धारित बिजली दर से 50 पैसे प्रति यूनिट अधिक की राशि वसूलने की कोशिश करेंगी। इसके बाद वह आम उपभोक्ताओं पर अपना शिकंजा कसेगी। बताया जा रहा है कि कहीं उद्यमियों को अपने कब्जे में लेने के बाद बिजली कंपनियां आम उपभोक्ताओं के बिलों में भी अपने आप इजाफा न कर दे। इससे न तो सरकार को बिजली की दर बढ़ने के कारण भारी विरोध का सामना करना पड़ेगा और न ही बिजली कंपनियों को फजीहत होगी।