आर्थिक विकास के साथ बढ़ रहा है सरकार का बोझ : प्रधानमंत्री (अंक 34)
Mar 31st, 2008 by admin
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने कहा है कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था प्रतिवर्ष आठ से नौ प्रतिशत की दर से विकसित हो रही है। जिसकी वजह से आम आदमी की आमदनी में भी बढ़ोतरी हुई है। अर्थव्यवस्था की बढ़ती विकास दर के कारण ही छोटे शहर बड़े शहर के रूप में और गांव छोटे शहरों के रूप में तब्दील होते जा रहे हैं। देश की अर्थव्यवस्था में बढ़ोतरी होना सरकार और जनता के लिए फायदेमंद है।
लेकिन इसके साथ ही सरकार पर अतिरिक्त बोझ भी बढ़ा है। क्योंकि आमदनी बढ़ने के कारण लोगों की मांगों में भी बढ़ोतरी हुई है जिसे पूरा करना सरकार का काम है।
वह दिल्ली सरकार द्वारा बवाना में बनाए जा रहे गैस आधारित बिजली उत्पादन संयंत्र प्रगति पावर-तीन के उद्घाटन अवसर पर लोगों को संबोधित कर रहे थे। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे, दिल्ली के उपराज्यपाल तेजेंद्र खन्ना, मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, दिल्ली के ऊर्जा मंत्री डा. अशोक कुमार वालिया, बाहरी दिल्ली के सांसद सज्जान कुमार, स्थानीय विधायक सुरेंद्र कुमार, विधानसभा के मुख्य सचेतक रमाकांत गोस्वामी, दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव राकेश मेहता और एनडीपीएल केञ् कई अधिकारियों सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने कहा कि देश की आम जनता की आमदनी में होने वाली बढ़ोतरी के कारण विभिन्न वस्तुओं की मांग में भी बढ़ोतरी हुई है। खासकर बिजली, स्वच्छ पेयजल, यातायात की सुगम व्यवस्था आदि शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में जिस अनुपात में बिजली की मांग में बढ़ोतरी हुई है उस अनुपात में बिजली की आपूर्ति नहीं की जा रही है। क्योंकि हम क्षमता के अनुरूप बिजली का उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं। हमारे पास पारंपरिक प्राकृतिक संसाधनों का भंडार है, लेकिन हम उन संसाधनों का दोहन नहीं कर सकते। इसके दोहन से हमारी आने वाली पीढि़यों को खतरे का सामना करना पड़ेगा। हमारे यहां कोयला का अकूत भंडार है, लेकिन कोयले से बिजली का उत्पादन करना पर्यावरणीय दृष्टिकोण से खतरनाक है। हमारे यहां पानी के भी खूब स्त्रोत हैं और सरकार पनबिजली उत्पादन के प्रति कारगर कदम भी उठा रही है।
लेकिन यह परियोजना भी लोगों के हित में नहीं है। क्यों कि पनबिजली के लिए बनाए जाने वाले बांधों से लाखों लोग बेघर हो रहे हैं और उनके सामने रोजी-रोटी का प्रश्न खड़ा हो गया है। अब हमारे पास तीसरे ऊर्जा के स्त्रोतों में सौर्य ऊर्जा भी काफी है, लेकिन इसका बड़े पैमाने पर उपयोग करने में अभी कुछ और वक्त लगेगा। हमारी सरकार न्यूक्लियर एनर्जी को साफ-सुथरे बिजली संसाधन के रूप में विकसित करने के लिए बचनबद्ध है और इसके विकास से ही हमारी जरूरतें पूरी हो सकेंगी।
इस अवसर पर केंद्रीय ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने दिल्ली और देशवासियों से वायदा करते हुए कहा कि आगामी वर्ष 2012 तक देश के सभी गांवों और शहरों में बिजली की अबाध रूप से आपूर्ति की जाएगी और कहीं भी बिजली की कटौती नहीं की जाएगी। उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को ‘लाडली’ की संज्ञा से अभिहित करते हुए कहा कि हम 2010 तक दिल्ली को बिजली के क्षेत्र में पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कारगर कदम उठा रहे हैं। उन्हीं कारगर कदमों की पहल प्रगति पावर-तीन की यह परियोजना है।