दिल्ली विकास के नए आयाम स्थापित करेगी : शीला (अंक 35)
Apr 9th, 2008 by admin
नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित ने दिल्ली विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर बजट सत्र के दौरान लिये गए महत्वपूर्ण निर्णयों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि राजधानी के लिए यह अत्यंत महत्व का विषय है कि विधानसभा ने इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिक संस्थान दिल्ली विधेयक 2007 को सर्वसम्मति से पारित किया। कई सर्वेक्षणों और अध्ययनों से पता चला कि आईटी क्षेत्र में योग्य मानव संसाधन की जबरदस्त किल्लत है। यह कमी 2010 तक गंभीर रूप ले लेगी। उच्च गुणवत्तापूर्ण की तकनीकी शिक्षा संस्थाओं में दाखिले में नाकाम रहने के कारण दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र के काफी विद्यार्थियों को विदेशी संस्थाओं या पत्राचार माध्यम से शिक्षा हासिल करनी पड़ती है।
सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से और स्वास्थ्य, जीव विज्ञान, ई-प्रशासन और वित्त, रक्षा से संबंधित आईटी के कार्यों और उद्योगों में आईटी के उपयोग पर जोर देने के पहलपूर्ण रवैये से उत्कृटता हासिल करने के लिए शीघ्र दिल्ली में आईआईआईटी दिल्ली नामक संस्थान स्थापित किया जाएगा। संस्थान में प्रारंभ में पहले शिक्षा वर्ष 2008-2009 में 125 अंडर एनआईसीटी कैम्पस में एक अलग भवन में चालू किया जाएगा। पांच वर्ष के बाद इस संस्थान के वित्तीय रूप से पूर तरह सक्षम बन जाने की उम्मीद है।
श्रीमती दीक्षित ने कहा कि राष्ट्रमंडल खेल शुरू होने से पहले दिल्ली को सुंदर और साफ शहर बनाने के उद्देश्य से सरकार सम्पित्त को बदरंग करने पर काबू पाने केञ् लिए कृतसंकल्प है। संपित्त में इमारत, झोपड़ी, अन्य निर्माण, दीवार, पेड़, खम्भे आदि शामिल हैं। अतः इन पर पेंट, सजावट ,लिखना आदि को अपराध माना जाएगा जिसके लिए कड़े जुर्माने का प्रावधान किया गया है। दिल्ली संपत्ति बदरंग रोक विधेयक-2007 को भी विधानसभा ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया। इस विधेयक में संपत्ति को बाहर से विकृत और खराब करने की प्रवृत्ती पर रोक लगाने पर का प्रावधान है। विधानसभा ने दिल्ली गुरूद्वारा संशोधन विधेयक-2008 को भी मंजूरी दे दी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उर्जा क्षेत्र के लिए वर्ष 2008-2009 में 1015.65 करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया गया है। सरकार ने डीईआरसी के नए मल्टीईयर रिटेल ऑर्डर के जरिए बिजली की दरों में वृद्घि को बेअसर करने के लिए एक वर्ष की अवधि के वास्ते सभी घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को सब्सिडी देने का फैसला किया है। इस प्रकार दरें 2004-05 के स्तर पर बनी रहेंगी। इससे 23 लाख घरेलू और 9,410 कृषि उपभोक्ताओं को फायदा होगा। सरकार ने प्रतिमाह गैर पीक और पीक महीनों में क्रमशः 150 और 200 यूनिट की खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को एक रुपया प्रति यूनिट सब्सिडी देने का फैसला किया है। इसके अलावा दिल्ली विद्युत बोर्ड और डेसू के समय की बकाया राशि माफ की गई है जो कि 2,539 करोड़ रुपए बनती है। घरेलू क्षेत्र में 2004 में बिजली की दरों में बढोत्तिरी नहीं की गई। उन्होंने बताया कि उपभोक्ताओं की शिकायतों को दूर करने के लिए व्यापक व्यवस्था की गई है। कोई भी उपभोक्ता मामूली दर पर निष्पक्ष रूप से केंद्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान, भारत सरकार से अपने मीटर की जांच करा सकता है। दिल्ली एकमात्रा ऐसा राज्य है जहां ऊर्जा संरक्षण के लिए सीएफएल और सोलर हीटर के इस्तेमाल पर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सरकार दिल्ली को विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए कृतसंकल्प है। दो वर्ष के बाद दिल्ली विद्युत के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन जाएगा बल्कि उसके पास अतिरिक्त बिजली होगी। इस समय वितरण कंपनियों या बिजली क्षेत्र की अन्य कंपनियों को कोई अनुदान नहीं दिया जा रहा और इस प्रकार हो रही बचत का इस्तेमाल ढांचागत विकास और जनता के कल्याण के लिए किया जा रहा है।
दिल्ली में पानी की कुल सप्लाई में काफी बढोत्तरी हुई है। 1997 में यह 570 एमजीडी थी जो अब 815 एमजीडी हो गई है। दिल्ली में दिसंबर 2009 तक एक समान जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 53 नए भूमिगत जलाशय चालू हो जाएंगे। दिल्ली जल बोर्ड की इंटरसेप्टर सीवर योजना पर काम किया जा रहा है जिसके लिए मैसर्स इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड को चुना गया है। उम्मीद है कि यमुना 2010 तक साफ-सुथरी दिखने लगेगी। 150 किलोमीटर ट्रंक सीवर में से 100 मिलोमीटर को चालू कर दिया गया है। पहली बार दिल्ली के सभी 189 देहाती गांवों में सीवर बिछाने का काम शुरु किया गया है। इसे दो वर्ष में पूरा कर लिया जाएगा। उन सभी अनधिकृत कॉलोनियों में भी पानी और सीवर की लाइनें बिछाने का काम किया जा रहा है जहां यह तकनीकी रूप से संभव है।
दिल्ली सरकार की अपने योजना बजट के 84 प्रतिशत भाग के सदुपयोग के कारण कार्य निष्पादन की सराहना करते हुए योजना आयोग ने फरवरी, 2008 में दिल्ली की योजनार राशि एक हजार करोड़ रुपए बढ़ा दी। योजना आयोग ने लाडली स्कीम की भी काफी सराहना की और कहा कि इसे कन्या भ्रूण हत्या पर काबू पाने, कन्याओं की शिक्षा और अस्पतालों में जनम की आवश्यकता के साथ जोड़ा गया है। इस स्कीम के अंतर्गत कन्या की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न चरणों में सरकार प्रोत्साहन राशि जमा कराती है जो उसे 18 वर्ष का होने पर लगभग एक लाख रुपया मिल जाती है।
योजना आयोग ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि स्कूल और अस्पताल स्थापित करने के लिए निजी भागीदारी को व्यापक बनाने में वह परामर्शदाता की भूमिका निभायेगा।
डीटीसी की लो फलोर, सेमी लो फलोर, एसी लो फलोर, एसी सेमी लो फलोर और स्टैण्डर्ड सीएनजी की कुल मिलाकर, 3,000 बसें मार्च 2009 तक खरीदने के लिए 1, 018 करोड़ रुपए की राशि निर्धारित की गई है। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में वर्ष 2008-2009 में एक हजार और बिस्तरों की व्यवस्था की जायेगी जबकि 2007-2008 में केवल 359 बिस्तर मुहैया कराये गये थे। भारतीय वन सर्वेक्षण की 2005 की रिपोर्ट में दिल्ली में हरित क्षेत्र का विस्तार करने के लिए दिल्ली सरकार की भूमिका की सराहना की गई है। यह हरित क्षेत्र 2007 में बढ़कर 300 वर्ग किलोमीटर से भी अधिक हो गया। वरिष्ठ नागरिकों, विधवाओं और विकलांग व्यक्तियों की मासिक पेंशन म् रुपए से बढ़ाकर एक हजार रुपए करदी गई है।
अंत में सबसे महत्वपूर्ण यह है कि सरकार ने वर्ष 2008-2009 में राष्ट्रमण्डल खेल की परियोजनाओं के लिए 1, 189 करोड़ रुपए निर्धारित किए हैं। 2007-2008 में इस काम पर लगभग 461 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। बढ़ी हुई राशि से राष्ट्रमण्डल खेल 2010 को सफलतापूर्वक आयोजित करने हेतु समुचित ढांचागत सुविधाएं उपलब्ध कराने की सरकार की वचनबद्घता प्रतीत होती है। दिल्ली की जनता ने महसूस कर लिया है कि मौजूदा सरकार राष्ट्रमण्डल खेल 2010 को दिल्ली के इतिहास में अविस्मरणीय बना सकेगी।