Posted in सम्पादकीय on Nov 27th, 2007 No Comments »
हाय महंगाई, महंगाई, महंगाई….। इन दिनों सबकी जुबान पर एक ही चर्चा है। गृहिणियां रोजाना इस बात का रोना रो रही हैं कि दाल महंगी, सब्जी महंगी, चावल महंगा, फल महंगा व दूध महंगा। प्याज अलग लोगों को रुला रहा है। आम आदमी का घरेलू बजट गड़बड़ा गया है। घर की औरतें कोई बचत नहीं […]
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Posted in सम्पादकीय on Nov 15th, 2007 No Comments »
देश में बच्चियों का वेश्यावृत्ति में आना तेज होता जा रहा है। भारत सरकार के महिला और बाल विकास विभाग के तहत ग्राम नियोजन योजना की रिपोर्ट तो यही बताती है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल जितनी जनसंख्या बढ़ती है, उससे पांच गुना रफतार से वेश्यावृत्ति में आने वाली लड़कियों की तादाद बढ़ […]
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Posted in सम्पादकीय on Nov 15th, 2007 No Comments »
दीपावली आ गई है। लेकिन घरों में पावर कट जारी है। सड़कों पर भी अंधेरा ही अंधेरा है और दिल तो पहले से ही काला हुआ पड़ा है। यहां तो रोशनी के लिए कोई जगह ही नहीं है। अगर किसी के दिल में दीये जल भी रहे हैं तो लोग उसे बुझाने पर तुले हैं। […]
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Posted in सम्पादकीय on Nov 15th, 2007 No Comments »
शादी का रजिस्ट्रेशन जरूट्री हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि देश के सभी राज्यों में यह मान्य होगा और सभी धर्मों के लोगों पर यह लागू होगा। चाहे वह हिन्दू हो या मूसलमान। हालांकि यह फैसला कोई नया नहीं है। बाल विवाह, दोनों पक्षों की सहमति के बगैर […]
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