Posted in सम्पादकीय on Dec 31st, 2007 No Comments »
हम नए साल में प्रवेश कर रहे हैं। हर कोई चाहता है कि हमारा प्रवेश भी सुखद हो और प्रस्थान भी। 2007 का आकलन किया जाए तो यह साल कई लोगों के लिए अच्छे पैगाम लेकर आया है। सबसे पहले बात करें राजनैतिक पार्टियों की। राजनैतिक पार्टियों में या कहें कि राजनीति में भाजपा के […]
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Posted in सम्पादकीय on Dec 31st, 2007 No Comments »
नए साल के आगमन की खुशी में हर जगह जाम छलकने का इंतजाम हो रहा है। रोजाना इस बात की जानकारी दी जा रही है कि किस होटल में कितनी कीमत पर कितनी शराब मिलेगी और आप अपने साथ किस-किस को शरीक कर सकते हैं। मुंबई में तो सरकार ने 25 दिसम्बर और 31 दिसम्बर […]
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Posted in सम्पादकीय on Dec 12th, 2007 No Comments »
अब लड़कियां भी शराब परोसेंगी, सुप्रीम कोर्ट ने इसकी इजाजत दे दी है। मयखानों में चार चांद लगेंगे। शराब ज्यादा बिकेंगी। कमाई ज्यादा होगी। लड़कियों के लिए रोजगार निकलेगा। कहा जा रहा है कि लड़कियों को समानता का अधिकार दिया जा रहा है। उन्हें मर्दों के बराबर लाकर खड़ा किया जा रहा है और न […]
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Posted in सम्पादकीय on Dec 3rd, 2007 No Comments »
जनसंघ से एक स्वच्छ राष्ट्रीय राजनीतिक दल के रूप में उभरकर सामने आने वाली भारतीय जनता पार्टी भी अब अनुशासनहीन हो गई है। इसकी स्वच्छता, पारदर्शिता और अनुशासन समाप्त हो गया है। इसके अंदर बैठे कुछ मुट्ठी भर लोग ही इस पर काबिज होकर अनुशासन को भंग कर रहे हैं। जिससे अब यह साफ होने […]
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