अपराधों का शहर दिल्ली (अंक 24)
Jan 21st, 2008 by admin
लूट, हत्या, छीना-झपटी, डकैती जैसी वारदातों से दिल्ली एक बार फिर दहल गई है। अपराध व आपराधिक गतिविधियां दिनो-दिन बढ़ती जा रही हैं। कहीं प्रेम को लेकर हत्या तो कहीं लूट के लिए हत्या तो कहीं बुजुर्ग की हत्या। नए साल में राजधानी में अपराध का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। पुलिस हाथ पर हाथ रखे बैठी है। कहीं कुछ नहीं हो रहा है। नए पुलिस कमिश्नर ने साल की शुरूआत में अपनी सालाना प्रेस कांफ्रेस में कहा कि दिल्ली को नए साल में सुरक्षित बना देंगें। लोगों को पुलिसिया सुविधा मुहैया कराने के लिए कई थानों में उन्होंने छापे भी मारे। कई एसएचओ बदल डाले। लेकिन परिणाम वही ढाक के तीन पात। दो दिन पहले ही दिनदहाड़े एक व्यापारी से 25 लाख रुपये लूट लिए। वह व्यापारी अपनी कार में जा रहा था और बदमाशों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने दिन-दहाड़े व्यापारी को रोका और रुपये लेकर फरार हो गए। पुलिस इस मामले में अब तक कुछ नहीं कर पाई है। उसी दिन एक और व्यापारी की कार लूट ली गई। पीतमपुरा में डकैतों ने युवती की हत्या कर दी। गत सप्ताह मॉडल टाउन इलाके में सरेआम सुबह केञ् समय एक व्यापारी को गोली मार दी।
दक्षिण दिल्ली में भी लूटपाट के चक्कर में हत्या हुई। आखिर यह क्या हो रहा है। एक तरफ सरकार दिल्ली में कॉमनवेल्थ खेल की तैयारी कर रही है। जगह-जगह होटल बनाए जा रहे हैं दिल्ली को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का शहर बनाया जा रहा है। ताकि आने वाले मेहमानों की नजर में हमारी बेइज्जती न हो। लेकिन अपराध पर अंकुश लगाने में हम बिल्कुल ही नाकामयाब हैं। जैसे-जैसे खेलों की तैयारी जोर पकड़ रही है वैसे-वैसे अपराध भी बढ़ रहा है। अगर यही आलम रहा तो बहुत सारे मेहमान दिल्ली आने से मना कर देंगे। ऐसी बात भी नहीं है कि दिल्ली में अपराध की जो वारदात हो रही हैं उसकी खबर अंतर्राष्ट्रीय मीडिया को नहीं है। जाहिर है अगर अपराध यूं ही बढ़ता रहा तो दिल्ली की छवि एक असंतुलित शहर की बन जाएगी। जिसका हमें खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार को इस दिशा में सोचना पड़ेगा। अगर हम चाहते हैं कि कॉमलवेल्थ गेम के लिए हर देश से अधिक से अधिक लोग आएं तो इसके लिए हमें दिल्ली की छवि को सुधारना होगा।