महंगाई का कहर (अंक 35)
Apr 9th, 2008 by admin
महंगाई अब नई उड़ान भर कर सातवें आसमान पर पहुंच गई। 22 मार्च को समाप्त सप्ताह में महंगाई दर ने 40 महीने के उच्चतम स्तर यानी सात प्रतिशत पर पहुंच कर न सिर्फ आम आदमी बल्कि सरकार की भी नींद उड़ा दी है। पिछले सप्ताह के मुकाबले महंगाई में 0.32 फीसदी की बढ़त हुई। पूर्व सप्ताह के दौरान यह 6.68 फीसदी थी जबकि पूर्व वर्ष की समान अवधि के दौरान यह 6.54 फीसदी थी। अब सरकार यह कह रही है कि महंगाई पर काबू पाने के लिए जल्द ही मंत्रिमंडल समूह की बैठक बुलाई जाएगी। सरकार ने यह भी कहा है कि जमाखोरों एवं मुनाफाखोरों के खिलाफ कड़े कदम उठाने से नहीं हिचकिचाएगी। वाणिज्य मंत्री कमलनाथ ने कहा है कि सरकार जमाखोरों एवं मुनाफाखोरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी करेंगी। महंगाई की यह दर पिछले 5 साल में सबसे ज्यादा है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मंदी जैसी हालत और इसके मद्देनजर ग्लोबल अर्थव्यवस्था भी इस चपेट में हैं। इस वजह से भारत में निवेश में भी कमी आने की आशंका पैदा हो गई। जाहिर है इसका असर विकास दर पर पड़ेगा और इसमें कमी भी आ सकती है।
लोग इस बात को लेकर काफी अटकलें लगा रहे हैं कि यूपीए सरकार कब तक टिकेगी। फिलहाल जो स्थिति है उससे तो यही लगता है कि देश के राजनीति व आर्थिक भविष्य पर खतरा पैदा हो गया, तो क्या राजनीतिक अनिश्चितता की वजह से विकास दर को गंभीर नुक्सान झेलना पड़ सकता है। जहां तक राजनीतिक पहलू की बात है तो वाम दल सरकार से समर्थन वापस जरूर लेंगे। लेकिन वामदल समर्थन वापस ले भी लेते हैं तो भी यूपीए की सरकार दिसंबर तक बनी रहेगी। चुनाव जब भी होते हैं वो दिसंबर या अगले साल जनवरी में होंगे। इसलिए सरकार चाहेगी कि दिसंबर तक महंगाई काबू में रहे। अनुमान है कि आगामी 12 महीनों में अर्थव्यवस्था की विकास दर धीमी रहेगी।
केंद्र सरकार की खाद्यान्नों की आयात निर्यात संबंधी नीतियां कारगर नहीं होने के कारण और देश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की विफलता ने मध्यम वर्ग की रसोई का संतुलन बिगाड़ दिया है। सरकार और रिजर्व बैंक के द्वारा मौद्रिक नीतियों में बदलाव ब्याज दरों से छेड़छाड़ और टैक्स दरों में कमी के जरिए स्थिति पर काबू पाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन आपूर्ति से जुड़ी मुश्किलों को कम किए बिना महंगाई की मार को कम करना संभव नहीं लग रहा और अगर ऐसा नहीं होता है तो आम जनता को तुरंत राहत नहीं मिलने वाली है।