ये दिल्ली है भाई… (अंक 39)
May 6th, 2008 by admin
लगातार बढ़ रही महंगाई, लगातार बढ़ रही गर्मी, लगातार बढ़ रहा पेयजल संकट और लगातार बढ़ रहे अपराध। दिल्ली की शायद यही कहानी है! महंगाई का आंकड़ा लगातार उंचाई की ओर बढ़ रहा है। हालत यह है कि मुद्रास्फीति की दर बढ़ कर 7.57 फीसदी तक पहुंच चुकी है, जो पिछले साढ़े तीन साल के अधिकतम स्तर पर है। नतीजतन सब्जी से लेकर घरेलू इस्तेमाल में आने वाली अधिकांश चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जिसने अच्छे-अच्छों के घर का बजट बिगाड़ कर रख दिया है। इसके अलावा लोहा, सीमेंट, अन्य निर्माण सामाग्री के दामों में हुई बेतहाशा वृद्घि ने मकान बनाने वालों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
गर्मी के दिनों में दिल्ली में बिजली की किल्लत कोई नई बात नहीं है लेकिन दिल्ली में बिजली वितरण का जिम्मा निजी कम्पनियों के हाथों में सौंपने के बाद यह कयास लगाया जा रहा था कि भविष्य में दिल्लीवासियों को बिजली की किल्लत से कुछ राहत मिल जाएगी, लेकिन पांच साल गुजर जाने के बाद भी निजी बिजली कम्पनियां सिवाए अपने खजाने भरने के दिल्लीवासियों को कोई राहत नहीं दे पाई है। हालत यह है कि आज गर्मी का पारा 42 के पार पहुंच चुका है और गर्मी के लगातार बढ़ने के साथ-साथ ही बिजली संकट भी बढ़ता जा रहा है।
कहने को दिल्ली देश की राजधानी है लेकिन पेयजल की बढ़ती समस्या को देखते हुए कई बार तो ऐसा लगता है कि यहां के नागरिक दिल्ली नहीं बल्कि किसी दूर-दराज के पिछड़े शहर में रह रहे हों। रही सही कसर दिल्ली में लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाओं ने पूरी कर दी है। पिछले एक माह के दौरान एनसीआर क्षेत्र विशेषकर दिल्ली में जितने बड़े पैमाने पर आपराधिक घटनाएं हुई हैं, शायद ही कभी हुई हों। यह बात सही है कि दिल्ली की लगातार बढ़ रही आबादी भी इन सब समस्याओं का कारण है। बावजूद इसके यह सरकार का कर्तव्य बनता है कि दिल्ली के नागरिकों को बिजली व पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करवाए और सुरक्षा व्यवस्था को सुधारे ताकि दिल्ली के लोग सुकून से रह सकें।