भ्रष्टाचार पर अंकुश जरूरी (अंक 41)
May 19th, 2008 by admin
हाल ही में अशोक विहार ट्रांसपोर्ट अथॉर्टी में कार्यरत एम.एल.ओ (मोटर लाइसेंसिंग अफसर) को भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफतार किया गया है। उक्त एम.एल.ओ. पर आरोप है कि मात्र 17 हजार रुपये की नौकरी करने वाला यह एम.एल.ओ. ग्रीन पार्क में करोड़ों रुपये के मकान में रहता है। इस एम.एल.ओ. के राजसी रहन-सहन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकेञ् मकान में बने बाथरूञ्म में भी ए.सी. लगा हुआ है। आज देश के अधिकांश सरकारी अधिकारी आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। यह अधिकारी तो भ्रष्टाचार की केवल बानगी है। विभिन्न सरकारी विभागों में फैले भ्रष्टाचार का आलम यह है कि उसमें कार्यरत चपरासी से लेकर उच्चाधिकारी तक हर महीने मिलने वाली तनख्वाह से कहीं ज्यादा कमाई भ्रष्टाचार के माध्यम से कर रहा है। आज किसी भी सरकारी अधिकारी को देख लीजिए इस महंगाई के जमाने में भी मामूली सी तनख्वाह पाने के बावजूद भी कई-कई लंबी गाडि़यों व बड़ी-बड़ी कोठियों का मालिक बना बैठा है। जितनी तनख्वाह इन अधिकारियों को मिलती है उससे कहीं ज्यादा पैसा तो वे व उनके बच्चे अय्याशियों में लुटा देते हैं। हालांकि भ्रष्टाचार के मामले में आज कोई भी विभाग पीछे नहीं है, लेकिन दिल्ली पुलिस, दिल्ली विकास प्राधीकरण, दिल्ली नगर निगम, खाद्य आपूर्ति विभाग, परिवहन विभाग, आयकर विभाग, सेल टैक्स विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभागों में भ्रष्टाचार की दीमक कुछ ज्यादा ही लग चुकी है।
सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में सरकार भी नाकाम दिखाई देती है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि किसी भी अधिकारी के खिलाफ तभी कोई कार्रवाई की जाती है जब वह भ्रष्टाचार करता हुआ रंगे हाथों पकड़ा जाता है। यदि वास्तव में सरकार भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना चाहती है तो सरकार को चाहिए कि सबसे पहले जिन विभागों में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है और उस विभाग में जो अधिकारी अथवा कर्मचारी मलाईदार पदों पर कार्यरत हैं, उनकी चल-अचल संपत्ति, रहन-सहन के तौर-तरीकों व उनके परिवार वालों द्वारा किये जाने वाले भारी भरकम खर्च की गुप-चुप तरीके से जांच करवाई जाए और दोषी पाए जाने वाले अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। सरकार का यह अभियान जहां एक ओर भ्रष्ट अधिकारियों को बेनकाब करने में सहायक सिद्घ होगा वहीं इस अभियान के डर से भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा।