जारी है महंगाई की आग (अंक 44)
Jun 10th, 2008 by admin
सालों पहले एक फिल्म आई थी ‘आज का एम.एल.ए.-रामअवतार’ जिसमें नेता की भूमिका अदा की थी राजेश खन्ना ने। इस फिल्म में राजेश खन्ना ने एक ऐसे नेता की भूमिका निभाई थी जो पहले तो चीजों के दाम बढ़ा देता है बाद में बढ़ाए गए दामों में से आधे दामों की वृद्घि वापस लेकर जनता की वाहवाही लूटता है। लगता है फिल्मों का असर अब हमारी राजनीति पर भी छाने लगा है। तभी तो सरकार ने पहले रसोई गैस की कीमतों में 50 रुपये प्रति सिलेण्डर, पैट्रोल में पांच रुपये प्रति लीटर और डीजल में तीन रुपये प्रति लीटर का इजाफा कर दिया और फिर अगले ही दिन इन पर लगने वाला टैक्स कम कर जनता को भरमाने की कोशिश की कि उन्होंने बढ़ी हुई कीमतों को कम करने की कोशिश की है। यह बात अलग है कि सरकार द्वारा टैक्स घटाए जाने के बाद कुछ राज्यों में रसोई गैस, पैट्रोल व डीजल के दामों में कमी आई है लेकिन बावजूद इसके दामों में वृद्घि हुई है। अभी हाल ही में दूध के दामों में भी एक रुपया प्रति लीटर की वृद्घि की गई है। नतीजतन महंगाई की दर पिछले कई सालों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए साढ़े आठ फीसदी का आकड़ा छूने के करीब है। पैट्रोलियम दामों में हुई वृद्घि का असर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप में सभी चीजों पर पड़ेगा। मतलब यह कि आने वाले दिनों में अन्य वस्तुओं के दामों में भी वृद्घि निश्चित है। देश की जनता यह बात समझ नहीं पा रही है कि जिस देश की कमान एक कुशल अर्थशास्त्री के हाथों में हो, फिर भी महंगाई थमने का नाम न ले। पैट्रोलियम पदार्थों में की गई वृद्घि को लेकर संप्रंग सरकार को समर्थन दे रहे वाममोर्चा ने भी अपनी आंखें लाल कर ली हैं। उसका कहना है कि सरकार का यह कदम पूरी तरह से जनविरोधी है और हम इसका सड़कों पर उतर कर विरोध करेंगे। लेकिन ताज्जुुब की बात यह है कि मोर्चे के नेताओं ने जनविरोधी सरकार करार दिये जाने के बावजूद अभी तक सरकार से समर्थन वापस लेने पर कोई बयान नहीं दिया है। जिससे उनकी करनी और कथनी में अंतर स्पष्ट नजर आ रहा है। यदि महंगाई की आग आगे भी जारी रही तो कोई बड़ी बात नहीं कि आने वाले लोकसभा चुनाव में संप्रंग सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़े।