Posted in सम्पादकीय on Sep 24th, 2008 No Comments »
देश में फेलता आतंकवाद सुरक्षा ऐजेंसियों के लिए किसी नासूर से कम नहीं है। कभी जम्मु-कश्मीर, आसाम जैसे सीमावर्ती राज्यों तक सीमित रहने वाली आतंकवादी गतिविधियां अब देश के हर राज्य में आम हो गई हैं। आतंकवादी किसी भी राज्य, किसी भी शहर में बेखौफ होकर सीरियल बलास्ट जैसी घटनाओं को अन्जाम देकर साफ बच […]
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Posted in सम्पादकीय on Sep 15th, 2008 No Comments »
हर देश की राष्ट्र भाषा होती है और उस देश की सरकार व जनता अपनी राष्ट्र भाषा सममान करती है। लेकिन इसे हिन्दुस्तान का दुर्भाग्य ही कहेंगे कि संविधान में भले ही हिन्दी को राष्ट्र भाषा का दर्जा दिया गया हो लेकिन इसके सममान को लेकर न तो आज तक कोई भी केन्द्र सरकार, राज्य […]
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Posted in सम्पादकीय on Sep 15th, 2008 No Comments »
बिहार में बाढ़ की विपदा कोई नई बात नहीं है। उत्तरी- बिहार में हर साल बाढ़ आती है और करोड़ों रुपये का नुकसान होता है। कोसी नदी का कहर भी कोई पहली बार नहीं बरपा है। करीब बीस साल पहले कोसी नदी की धार से बचने के लिए नेपाल सीमा पर बांध बनाया गया। पर […]
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Posted in सम्पादकीय on Sep 15th, 2008 No Comments »
दिल्लीवासी आजकल सड़कों पर जाम की समस्या से खासे त्रस्त हैं। वैसे तो दिल्ली के विभिन्न मार्गों पर ट्रेफिक जाम रहना दिल्ली की नियति बन चुका है लेकिन बरसातों के कारण ट्रेफिक जाम की समस्या और भी गंभीर हो गई है। हालत यह है कि मात्र 10 से 20 किलोमीटर का रास्ता तय करने के […]
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Posted in सम्पादकीय on Sep 2nd, 2008 No Comments »
भारत ने ओलंपिक में तीन मेडल जीत लिए हैं, एक स्वर्ण तो दो कांस्य। इतने मेडल पहली बार भारत को ओलंपिक में मिले हैं, बहुत खुशी की बात है। भारतवासियों को भी कहने का मौका मिल गया है कि वे ओलंपिक में मेडल जीत सकते हैं। यह अलग बात है कि मेडल जीतने में चीन […]
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Posted in सम्पादकीय on Sep 2nd, 2008 No Comments »
इसे देश चलाने वाली सरकार की नाकामी कहें या फिर विभिन्न राजनीतिक दलों की महत्वकांक्षा कि आज देश के दुश्मनों पर गोली चलाने वाले जवानों को अपने ही देशवासियों पर गोली चलानी पड़ रही है। आज पूरा जममू-कश्मीर जल रहा है, लेकिन सभी राजनीतिक दल जममू-कश्मीर में लगी आग बुझाने का प्रयास करने की बजाय […]
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Posted in सम्पादकीय on Sep 2nd, 2008 No Comments »
पांच साल पूर्व आपके सहयोग से ‘अपनी दिल्ली’ का जो छोटा सा पौधा लगाया था वह आज एक वृक्ष बन कर आपके सामने खड़ा है। इन पांच वर्षों के दौरान प्रबुद्घ पाठकों व विज्ञापन दाताओं ने जो अपार स्नेह एवं सहयोग हमें दिया उसी का नतीजा है कि आज पत्रका रिता के क्षेत्र में अपनी […]
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Posted in सम्पादकीय on Sep 2nd, 2008 No Comments »
पहले राजस्थान, फिर कर्नाटक और उसके बाद गुजरात में हुए सीरियल बम धमाकों ने सरकार की गुप्तचर एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवालिया निशान लगा दिया है। इन धमाकों में सैकड़ों निर्दोष लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा और सैकड़ों लोग घायल हो गए। ऐसा नहीं है कि देश में पहली […]
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Posted in सम्पादकीय on Sep 2nd, 2008 No Comments »
मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने संसद में भले ही बहुमत की लड़ाई जीत ली हो, लेकिन विश्वास मत के दौरान दो दिनों तक जो कुछ भी घटा उसने भारतीय लोकतंत्र को शर्मसार कर दिया है। एक जमाना था जब हमारे देश की बागडोर पंडित जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री जैसे महान […]
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