आतंकवाद का खौफ (अंक 52)
Sep 2nd, 2008 by admin
पहले राजस्थान, फिर कर्नाटक और उसके बाद गुजरात में हुए सीरियल बम धमाकों ने सरकार की गुप्तचर एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवालिया निशान लगा दिया है। इन धमाकों में सैकड़ों निर्दोष लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा और सैकड़ों लोग घायल हो गए। ऐसा नहीं है कि देश में पहली बार आतंकियों ने ऐसे कृत्यो को अन्जाम दिया है। देश में घुसे आतंकी समय-समय पर बम धमाके कर देश की सुरक्षा व्यवस्था को ठेंगा दिखाते रहे हैं। लेकिन सरकार है कि हर बार ऐसी घटनाओं के लिए पड़ोसी देश को जिमेदार ठहरा कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेती है।
देश में रह रहे प्रत्येक नागरिक की जान-माल की सुरक्षा का जिममा सरकार का होता है और देश के भीतर पुख्त सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई सुरक्षा एजेंसियां भी बनाई गई हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से देश में चल रही राजनीतिक उठापटक व राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप को देख कर ऐसा लगता है कि जैसे यह सुरक्षा एजेंसियां देश में सक्रिय आतंकियों को ढूंढने की बजाय नेताओं की मुखबरी करने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रही हैं। यहां एक बात और ध्यान देने वाली है कि हाल ही में हुए तीनों सीरियल बम ホलास्ट भाजपा शासित राज्यों में ही हुए हैं।
ऐसा भले ही संयोगवश हुआ हो, लेकिन इस मामले में कहीं न कहीं आतंकवादियों की सोची-समझी साजिश भी नजर आ रही है। इसका सीधा कारण केन्द्र में बैठी कांग्रेस सरकार द्वारा आतंकवादियों के खिलाफ अपनाया जा रहा नरम रवैया है। जिस कारण आतंकवादी अपने कृत्य को बेखौफ होकर अंजाम दे रहे हैं। हो सकता है भाजपा शासित प्रदेशों में आतंकियों द्वारा आतंक फेसल कर वहां की जनता को यह संदेश देने की कोशिश की जा रही हो कि भाजपा के राज में कोई भी नागरिक सुरक्षित नहीं रह सकता है। यदि आतंकियों की यही सोच है तो आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश, उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भी यह आतंकी अपने काम को अंजाम दे सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो निश्चित रूप से यह आतंकी अपने मकसद में कामयाम हो जाएंगे।