अपमानित होती राष्ट्र भाषा (वर्ष-6, अंक 6)
Sep 15th, 2008 by admin
हर देश की राष्ट्र भाषा होती है और उस देश की सरकार व जनता अपनी राष्ट्र भाषा सममान करती है। लेकिन इसे हिन्दुस्तान का दुर्भाग्य ही कहेंगे कि संविधान में भले ही हिन्दी को राष्ट्र भाषा का दर्जा दिया गया हो लेकिन इसके सममान को लेकर न तो आज तक कोई भी केन्द्र सरकार, राज्य सरकार और न ही यहां के नेता गंभीर रहे हों। हाल ही में सपा सांसद एवं अपने जमाने की मशहूर अभिनेत्री जया बच्चन ने मुम्बई के एक समारोह में हिन्दी में भाषण क्या दे दिया कि वहां की राजनीति में तूफान खड़ा हो गया।
यह तूफान किसी और ने नहीं बल्कि अपने आपको सबसे ज्यादा राष्ट्र भक्त बताने वाली महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने खड़ा किया। वैसे तो महाराष्ट्र में अपने वजूद को बचाए रखने के लिए मनसे सुप्रिमो राज ठाकरे आए दिन कोई न कोई ऐसी बयानबाजी करते रहते हैं जिससे मुम्बई व महाराष्ट्र में तनाव की स्थिति पैदा हो जाती है।
इस मामले में सबसे ज्यादा गंभीर व चिंता की बात यह है कि एक हिन्दुस्तानी अपने ही देश में अपनी राष्ट्र भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकता। यह बात अलग है कि हर प्रदेश की अपनी कोई न कोई मातृ भाषा है और वहां का हर नागरिक उस राज्य की मातृ भाषा का मान-सम्मान करता है। राज ठाकरे यदि महाराष्ट्र में रहने वाले लोगों को मराठी भाषा का इस्तेमाल करने पर जोर देते हैं तो किसी को भी इस बात पर एतराज नहीं होना चाहिए क्योकि देश के अधिकांश राज्यों में अपनी मातृ भाषा को न केवल पाठ्य क्रम में आवश्यक किया गया है बल्कि बोलचाल में भी अधिक से अधिक मातृ भाषा का प्रयोग करने की चेष्टा की गई है। इस मामले में यदि राज ठाकरे यह कह कर जया का विरोध कर रहे हैं कि उन्होंने यूपी को अपना घर व हिन्दी को मातृ भाषा बताया, तो भी यह विरोध किसी भी तरीके से उचित नहीं माना जा सकता।
कयोंकि हिन्दी यूपी की मातृ भाषा बाद में है पहले भारत की राष्ट्र भाषा है। इसके अलावा किसी भी राज्य में भले ही वहां की मातृ भाषा का प्रयोग किया जाता हो, लेकिन राष्ट्र भाषा होने के कारण हिन्दी का प्रयोग करने में किसी भी राज्य की सरकार को कोई आपत्ति नहीं हो सकती। राज ठाकरे ने यह सब बबाल भले ही मनसे को राजनीतिक संजीवनी देने के लिए खड़ा किया हो लेकिन इस सारे प्रकरण में केन्द्र सरकार की चुप्पी बेहद शर्मनाक है।
जिस राष्ट्र भाषा को बोलने के बाद किसी व्यक्ति को सार्वजनिक माफी मांगनी पड़े ऐसी राष्ट्र भाषा का सम्मान कब तक और कितना रह पाएगा, यह तो भविष्य ही बताएगा, लेकिन यदि केन्द्र सरकार ने राष्ट्र भाषा हिन्दी को राष्ट्र भाषा के रूप में जीवित रखने के लिए गंभीरता से जन-जागरण अभियान नहीं चलाया तो आने वाले कुछ वर्षों में हमारी राष्ट्र भाषा हिन्दी अतीत का इतिहास बन कर रह जाएगी।