Posted in सम्पादकीय on Oct 31st, 2008 No Comments »
दीपावली आ गई है। लेकिन घरों में पावर कट जारी है। सड़कों पर भी अंधेरा ही अंधेरा है और दिल तो पहले से ही काला हुआ पड़ा है। यहां तो रोशनी के लिए कोई जगह ही नहीं है। अगर किसी के दिल में दीये जल भी रहे हैं तो लोग उसे बुझाने पर तुले हैं। […]
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Posted in सम्पादकीय on Oct 13th, 2008 No Comments »
अमेरिका डूब गया, अब भारत की बारी है। दशहरा एवं दीपावली की मस्ती में डूबे देशवासियों को अब यह अहसास हो जाना चाहिए कि देश मंदी की चपेट में आ चुका है। शेयर बाजार से लेकर प्रॉपर्टी बाजार या फिर औद्योगिक बाजार, सबके सब धड़ाम हो चुकेञ् हैं। इन्हें तो इतनी चोट लगी है कि […]
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Posted in सम्पादकीय on Oct 13th, 2008 No Comments »
अच्छाई पर बुराई की जीत के रुप में हम हर साल दशहरे को मनाते हैं। रावण, कुंभकर्ण व अन्य राक्षसों के पुतले को जलाते हैं। पटाखे फोड़ते हैं। लाखों रुपये खर्च कर मेले का आयोजन होता है। दस दिनों तक रामलीला का मंचन होता है। शाम से देर रात तक हर गली-नुककड़ पर रामलीला के […]
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Posted in सम्पादकीय on Oct 13th, 2008 No Comments »
शनिवार को फिर बम फट गया। शुक्र है इस बार यह सीरियल बलास्ट का रूप नहीं लिया। महरौली में यह वारदात हुई जिसमें कई लोगों के मरने एवं दर्जन भर से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है। ठीक पंद्रह दिन पहले शनिवार को ही दिल्ली में सीरियल बलास्ट हुआ था और पूरी दिल्ली […]
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