दिल्ली में कांग्रेस की हैट्रिक (वर्ष-6, अंक 18)
Dec 16th, 2008 by admin
दिल्ली में सभी चुनावी विश्लेषणों को झुठलाते हुए कांग्रेस एक बार फिर शानदार जीत के साथ साथ में आ गई है। शीला ने अपनी व पार्टी की जीत की हैट्रिक बना कर न केवल पार्टी में ही अपने विरोधियों को आइना दिखा दिया है बल्कि भाजपा को भी उसकी औकात बता दी है। दिल्ली की मुख्यमंत्री की कुर्सि पर गत क् वर्षों से काबिज़ श्रीमती शीला दीक्षित को अपने मुख्यमंत्रीत्व काल में समय-समय पर न केवल अपनी ही पार्टी के नेताओं का विरोध झेलना पड़ा बल्कि मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के आरोपों को भी सहन करना पड़ा। बावजूद इसके उन्होंने अपनी इच्छाशक्ति को कभी कमजोर नहीं होने दिया। उन पर बिजली के निजीकरण में करोड़ों रुपये का घोटाला किये जाने केञ् आरोप भी पक्ष व विपक्ष के नेताओं द्वारा लगाए गए।
बी.आर.टी. व बल्यू लाईन बसों के मामलों में भी विपक्षियों ने उन्हें घेरने की कोशिश की लेकिन श्रीमती शीला दीक्षित इन सब आरोपों से बेपरवाह होकर दिल्ली के विकास में जुटी रहीं। हालांकि चुनाव के समय भाजपा ने महंगाई, आतंकवाद जैसे जनता से जुड़े मुद्दों को उछाल कर दिल्ली के मतदाताओं को लुभाने की कोशिश की, लेकिन दिल्ली के विकास का मुद्दा भाजपा पर भारी पड़ा और जनता ने एक बार फिर शीला व कांग्रेस में विश्वास व्यक्ति करते हुए भाजपा को नकार दिया। दिल्ली में भाजपा की यह हार केवल भाजपा की ही नहीं बल्कि भाजपा के सी.एम. इन वेटिंग विजय कुमार मल्होत्रा की भी हार है। क्योकि दिल्ली के मतदाताओं ने एक तरह से भाजपा के नहीं बल्कि विजय कुमार मल्होत्रा के नेतृत्व को नकार दिया है।