अलविदा 2008 (वर्ष-6, अंक 21)
Jan 14th, 2009 by admin
वर्ष 2008जा रहा है और वर्ष 2009 आ रहा है। वर्ष 2008 में हुई घटनाएं हमारे व हमारे देश के लिए किसी भी रूप में अच्छी नहीं कही जा सकती हैं। जयपुर में सीरियल बम पलास्ट, बैंगलोर में बम धमाके, दिल्ली में सीरियल बम पलास्ट, गुजरात में कई स्थानों पर बम धमाके और वर्ष के जाते-जाते मुमबई में अब तक के सबसे बड़े आतंकी हमले ने देश की जनता को झकझोर कर रख दिया। आतंकवाद की घटनाएं अतीत में शायद ही किसी वर्ष घटी हों। यह बात अलग है कि हर आतंकी घटना के बाद हर भारतवासी पहले से कहीं अधिक मानसिक शक्ति के साथ आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए तैयार खड़ा दिखाई दिया है। महंगाई ने भी इस वर्ष इतनी लमबी छलांग लगाई कि क्या गरीब और क्या अमीर सबको छठी का दूध याद आ गया। कारोबार की दृष्टि से भी यह वर्ष कोई बहुत अच्छा नहीं बीता। 21 हजार का रिकॉर्ड आंकड़ा छूने के बाद शेयर बाजार के सेंसैकस ने ऐसा गोता लगाया कि देखते ही देखते अरबोंपति भी कंगाल हो गए। बड़ी-बड़ी कंपनियों की शेयर पूंजी देखते ही देखते एक चौथाई रह गई। महंगाई व मंदी का असर रियल स्टेट पर भी पड़ा और प्रोपर्टी बजार में भी भारी गिरावट दर्ज की गई।
अगर राजनैतिक दलों की बात करें तो यह साल भाजपा के लिए भी कोई खास नहीं रहा। जहां एक ओर राजस्थान में उसे हार का मुंह देखना पड़ा वहीं दिल्ली में भी भाजपा की हवा निकल गई और सीएम इन वेटिंग प्रो. विजय कुमार मलहोत्रा का मुख्यमंत्री बनने का सपना भी चकना चूर हो गया। करीब सवा साल पहले उत्तर प्रदेश में साथ में काबिज होने वाली बसपा को भी इस साल में कई झटके सहने पड़े। पार्टी के एक सांसद व कई विधायक एक-एक कर किसी न किसी आपराधिक मामलों में फेसला फस्ता चले गए। कुल मिला कर कहा जाए तो वर्ष 2008 ने देश व जनता को खुशहाली कम और परेशानी ज्यादा दी।
इस साल की समाप्ति केञ् समय देश व जनता के सामने कई ऐसी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं जिनका सामना देश व जनता को वर्ष 2009 में भी करना पड़ेगा। वर्ष 2009 देश व जनता के लिए खुशहाली व नई खुशियां लेकर आए, इसी कामना के साथ मैं एक कवि की यह पंक्तिया दोहराना चाहता हूं ‘छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी, नए दौर में लिखेंगे हम मिल कर नई कहानी’।