शहादत पर राजनीति (वर्ष-6, अंक 20)
Jan 14th, 2009 by admin
अभी दिल्ली के बाटला हाऊस में उग्रवादियों के एन्काउंटर के दौरान शहीद हुए पुलिस अधिकारी महेश चंद शर्मा की शहादत पर सपा नेता अमर सिंह द्वारा दिये गए बयान का बवाल थमा भी नहीं था कि अब केन्द्र में अल्पसंखयक मामलों के केन्द्रिय मंत्री अबदुल रहमान अंतुले ने मुमबई में हुए आतंकी हमले के दौरान महाराष्ट्र एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे की शहादत पर सवाल खड़े करने वाले बयान देकर राजनीतिक हलकों में तूफान पैदा कर दिया है। उन्होंने अपने बयान के माध्यम से करकरे की हत्या को साध्वी प्रज्ञा ठाकुर मामले से जोड़कर अल्पसंखयकों का सच्चा हितैषी बनने की जो कोशिश की है वह किसी भी मायने में राष्ट्र हित में नहीं है। मुमबई में हुए आतंकी हमले के लिए जहां एक ओर भारत सरकार व सुरक्षा एजेंसियां पाकिस्तान को इस बात का सबूत दे रही है कि इस हमले में मारे गए आतंकी व पकड़ा गया आतंकी कसाब पाकिस्तानी है वहीं दूसरी ओर अंतुले का यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से कहीं न कहीं पाकिस्तान का बचाव कर रहा है। न तो आतंकवाद का कोई धर्म होता है और न ही कोई मजहब लेकिन हमारे देश के सात्तलोलुप नेता देश में फेले आतंकवाद को भी धर्म व मजहब के नाम पर बांट कर अपनी राजनैतिक रोटियां सेकने में मश्गूल हैं। किसी एक विशेष धर्म या मजहब के वोट हासिल करने के लिए हमारे देश के नेता जिस ढंग से आए दिन बयान बाजी कर रहे हैं वह किसी भी तरीके से देश व जनता के हित में नहीं है। ऐसे में अब जनता का फर्ज बनता है कि समय आने पर इन सात्तलोलुप नेताओं को इनके अंजाम तक पहुंचा दे।