{ इसमें दैनिक दिनचर्या के उदाहरणों के माध्यम से मूल और उपयोगी अंतर्दृष्टि प्रदान करने की क्षमता है। यह व्यक्तियों को निडर जीवन जीने, व्यक्तित्व विकसित करने और सकारात्मक जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है।
text-align: center; लगभग 5 वर्षों से, कई प्रसिद्ध संस्थानों, स्कूलों, कॉलेजों, कंपनियों ने उन्हें अपने कार्यक्रमों के लिए निडर जीवन और व्यक्तित्व विकास पर सेमिनारों में आमंत्रित करते है, संजय रावल द्वारा आयोजित सभी सेमिनार नि:शुल्क हैं। उन्होंने पिछले पांच वर्षों में 2000 से अधिक सेमिनार आयोजित किए हैं।
} संजय रावल का जन्म 5 सितंबर 1966 को पालनपुर (गुजरात) में एक मध्यमवर्गीय ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उसके पिता के पास 100 वर्ग फुट की एक छोटी सी किराए की सिलाई की दुकान थी। उन्होंने जीवन की यात्रा वहीं से शुरू की और जीवन के उबड़-खाबड़ रास्तों से अपनी यात्रा को स्थिर करने की कोशिश कर रहे थे। उस समय उन्होंने जीवन में दो चीजें पाईं थी पढ़ना और व्यायाम करना। उन्होंने बीएससी की पढ़ाई की। 1987 में पालनपुर साइंस कॉलेज से एलएलबी (रसायन विज्ञान) और 2011 में पालनपुर लॉ कॉलेज से एलएलबी।
#main अपने करियर की शुरुआत में, उन्हें विश्वासघात और धोखाधड़ी का कड़वा अनुभव भी हुआ था । उसने अपने बड़े भाई की मदद से इस स्थिति से बाहर निकलने की कोशिश की। उन्हें भारी आर्थिक नुकसान भी हुआ। शादी से पहले उसके पिता की मृत्यु हो गई।
{ जब चीजें ठीक चल रही थीं, उनके बड़े भाई की 2001 में एक कार दुर्घटना में मृत्यु हो गई और उनकी असली यात्रा वहीं से शुरू हुई।
संजय रावल जी का जीवन बड़ा ही संघर्षपूर्ण रहा है उनका जीवन प्रेरणादायक है। बिना पिता के जीवन जीना तो बहुत मुश्किल होता है। उस पर अच्छी शिक्षा लेना और भी बड़ी परेशानी की बात थी
display: inline-block; जब भी इवेंट्स मे संजय रावल जी का कही भी आगमन होता है तो वहां लाखों की तादाद में लोग आते है और उनकी बातों को सुनते है। बहुत से लोगों और युवा ने आज उनसे प्राप्त ज्ञान को अपने जीवन में उतारा है
color:#555; संजय रावल जी ने लाखों युवा को जीवन जीने का सही मार्ग बताया है। वजी जोश भरी बातों से उनकी डूबी हुई नाव को दोबारा उभारा है और अपने काम के प्रति निष्ठा भाव को दोबारा जगाया है।
border-radius:10px; संजय रावल जी का काम करने का अंदाज ही अलग है उनकी शकल पर जरा भी नहीं लगता कि वे थोड़ा भी थके हुए है या फिर किसी बात से परेशान है। नए तरीके नयी नयी तकनीक बताते है। हारा हुआ व्यकती भी उन से मिलकर नयी ऊर्जा ले कर वापस घर जाता है उन्होने 2000 से अधिक सेमिनार किये हैं
font-family:Tahoma,Geneva,Arial,sans-serif;font-size:11px; कोई भी हारा हुआ व्यक्ति उनसे मिल कर खिलखिला उठता है। जिस तरह का कठिन जीवन उन्होंने जिया है| बड़ी ही तारीफ की बात है. उनका सपना गुजरात में सबसे बड़ा स्किल्स बेज विश्वविद्यालय खोलना है
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