Page not found
#main आप देखेंगे की हिन्दू मंदिरों में चढ़ावा दूसरे धर्म के पूजाघरों के मुकाबले सबसे ज्यादा आता है ,इतना कि उसे गिनने के लिए मशीनों की मदद लेना पड़ती है,फिर भी भगवान के भोजन और श्रृंगार के लिए अतिरिक्त आमदनी की जरूरत पड़ती है और ये जरूरत ही दर्शन शुल्क का असल कारण है. देवता तो देवता, हमारे यहां फकीरों के मंदिरों में भी शुल्क की व्यवस्था है क्योंकि प्रबंधकों ने पाषाण शिला पर बैठने वाले फकीरों की प्रतिमाओं को बैठने के लिए स्वर्णजटित सिंघासन जो बनवा दिए हैं.
{ बेचारा हिन्दू ‘ हरि को भजे सो हरी को होई ‘ के फार्मूले पर यकीन करता है लेकिन जब मंदिर पहुंचता है तो वहां के प्रबंध देखकर ठगा सा रह जाता है .एक सनातनी हिन्दू के नाते देव् दर्शन मुझे भी प्रिय है. लेकिन मै देव् दर्शन के लिए जब रुपया खर्च नहीं कर पाता तो सुगम दर्शनों के बजाय दुर्गम दर्शनों को चुनता हूँ और कभी-कभी कभी तो मंदिर के शिखर पर फहराते ध्वज को प्रणाम करके भी मन को समझा लेता हूँ. मन मानता नहीं है लेकिन उसे मनाना पड़ता है .
हमारे गांव के मंदिरों में देव् दर्शन का कोई शुल्क नहीं लगता.वहां विग्रहों की पूजा हम बेखटके कर सकते हैं. कोई गरीब-अमीर और वीआईपी नहीं होता ,लेकिन बड़े शहरों में ये सब नहीं है .बड़े शहरोंमें गरीब,अमीर और वीआईपी सब होते हैं और सबके लिए इंतजाम करना पड़ता है भगवान को. भगवान के नाम पर इन पूजाघरों में लंगर चलते हैं और इसके लिए धन चाहिए .भगवान तो खेती करते नहीं,उद्योग चलते नहीं सो ऐसे लोगों से धन शुल्क के रूप में ले लेते हैं .
display: inline-block; हिन्दू मंदिरोंमें शुल्क की प्रथा भारत में ही नहीं बल्कि अमेरिका तक में है. अमेरिका में भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए कम से कम 11 डालर लगते हैं .लोग देते भी हैं लेकिन दर्शन के कोई पैसे नहीं लगते. दर्शन के पैसे तो भारत में ही लगते हैं. चीन में भी बौद्ध मंदिरों में दर्शन और पूजा निशुल्क है .एशिया के छोटे-बड़े देशों में मुझे कहीं देव् दर्शन के लिए पैसा नहीं देना पड़ता ,लेकिन अपने ही देश में मेरे लिए ये सुविधाएं नहीं हैं .और शायद हो भी नहीं सकतीं .आखिर भव्यता,दिव्यता के लिए पैसा तो चाहिए .
color:#555; हमारे अध्येता मित्र चुन्नीलाल बता रहे थे कि योरोप में धर्मकर्म के लिए सरकार फंड जुटाती है ,लेकिन हमारे यहां सरकार मंदिर बनाने के लिए रथ यात्राएं करती है. चन्दा जुटाती है .अदालत जाती है ,लेकिन केवल हिन्दू धर्म के लिए दूसरे धर्मों से उसे कोई लेना देना नहीं है .उसे क्या किसी को कोई लेना देना नहीं है. वैसे सरकारों को किसी भी धर्म से कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए .लेकिन हमारे यहां है .और ये अच्छी बात है .हम कहने भर को धर्म निरपेक्ष हैं ,जबकि हकीकत में हम धर्म सापेक्ष हैं .हमारी धर्म सापेक्षता हर चीज पर भारी पड़ती है .
border-radius:10px; बहरहाल मै पूजाघरों में शुल्क की बात कर रहा था. मेरा मुद्दा न महगाई है ,न भ्र्ष्टाचार ,न राष्ट्रपति चुनाव है और न पूर्व उप राष्ट्रपति पर लगे जासूसी के आरोप .मुझे किसी दूसरे मुद्दे से कुछ लेना -देना ही नहीं है, ‘ हुईए वही जो राम रची राखा ‘ .डालर के मुकाबले रुपया लुढ़के ,हमें क्या ? जेहि विधि राखे राम,तेहि विधि रहिये .राम जी चाहते हैं तभी तो सब कुछ हो रहा है ,हम खामखां किसी और को क्यों कोसें ? लेकिन भगवान से हमारी एक ही विनती है कि वे हम आदमियों की तरह निरीह बने न रहें .अपने दर्शनों को निशुल्क करने के लिए कोई जुगत बैठाएं .अपने प्रबंधकों को स्वप्न में आकर निर्देश दें .अन्यथा हमारी कौन सुनने वाला है ?
font-family:Tahoma,Geneva,Arial,sans-serif;font-size:11px;
padding:10px 10px 10px 36px;
margin:10px;
}
h1
{
font-size: 150px;
margin: 100px 0 0 0;