अंतिम संस्कार में गोबर से बनी लकडिय़ां प्रयोग करने से पर्यावरण की होगी सुरक्षा

नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद् के राहुल कुमार सिंह (पूर्णकालिक कार्यकर्ता) ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो रही है, जिसके कारण शमशानों में लंबी-लंबी लाइनें लग रही है। बड़ी संख्या में हो रही मौतों के कारण कई शमशान घाटों में लकड़ी की कमी होने लगी है। ऐसे में विश्व हिंदू परिषद ने दिल्ली में अंतिम संस्कार के लिए एक अनूठी पहल की है। इसकी शुरूआत विहिप ने लकडिय़ों की जगह गाय के गोबर से बनी लकडिय़ां जैसे उपले शमशान घाट में रखवाए है और शव को रखने के लिए लोहे के स्टैंड भी बनवाए गए है।
लकड़ी की जगह अंतिम संस्कार में गोबर के उपले प्रयोग करने से लकड़ी की कमी भी नहीं होगी और पर्यावरण की भी सुरक्षा हो जाएगी। अंतिम संस्कार के लिए लोहे का स्टैंड बनाने की मशीन अंतिम संस्कार में प्रयुक्त होने वाली सामग्री का कम से कम इस्तेमाल हो और अंतिम संस्कार भी पर्यावरण अनुकूल हो।
विहिप इस प्रक्रिया के लिए लोगो को जागरूक कर रहा है और शमशान घाटों तक गौ काष्ठ पहुंचा रहा है। इससे गरीब लोगो का भी लाभ होगा। राहुल कुमार सिंह ने बताया की गोबर के उपले या गौ काष्ठ का ही उपयोग क्यों करें और उसका क्या लाभ होगा। उन्होंने आगे बताया कि यह एक पर्यावरण पूरक प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया के द्वारा कम खर्च में दहन किया जा सकता है। इस प्रक्रिया द्वारा गौमाता का भी संरक्षण होगा। ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। यह एक वैदिक प्रक्रिया है। गौ काष्ठ के दहन से वायु प्रदूषण कम होगा। गौ काष्ठ दहन से ज्यादा पेड़ों को बचाया जा सकता है।

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