इस दिन काले तिलों सहित स्नान करके व व्रत रख के रात्रि में भगवान शिव की विधिवत आराधना करना कल्याणकारी माना जाता है। दूसरे दिन अर्थात अमावस के दिन मिष्ठान्नादि सहित ब्राहम्णों तथा शारीरिक रुप से अस्मर्थ लोगों को भोजन देने के बाद ही स्वयं भोजन करना चाहिए। यह व्रत महा कल्याणकारी होता है और अश्वमेध यज्ञ तुल्य फल प्राप्त होता है। इस दिन किए गए अनुष्ठानों, पूजा व व्रत का विशेष लाभ मिलता है। इस दिन चंद्रमा क्षीण होगा और सृष्टि को ऊर्जा प्रदान करने में अक्षम होगा। इसलिए अलौकिक शक्तियां प्राप्त करने का यह सर्वाधिक उपयुक्त समय होता है जब ऋद्धि-सिद्धि प्राप्त होती है। इस रात भगवान शिव का विवाह हुआ था। भारतीय जीवन में ऐसे लोक पर्व वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में भले ही धूमिल हो रहे हों परंतु इनका वैज्ञानिक पक्ष आस्था के आगे उजागर हो नहीं पाता। भारतीय आस्था में चाहे सूर्य ग्रहण हो या कुंभ का पर्वए दोनों ही समान महत्व रखते हैं। शिव रात्रि एक ऐसा महत्वपूर्ण पर्व है जो देश के हर कोने में मनाया जाता है। यह पर्व भगवान शिव एवं माता पार्वती के मिलन का महापर्व कहलाता है। इस व्रत से साधकों को इच्छित फल,धन, वैभव, सौभाग्य, सुख समृद्धि, आरोग्य, संतान आदि की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि सृष्टि के आरंभ में इसी दिन मध्य रात्रि भगवान शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रुप में अवतरण हुआ था। प्रलय की वेला में इसी दिन प्रदोश के समय शिव तांडव करते हुए ब्रहाण्ड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते हैं। इसीलिए, इसे महाशिवरात्रि अथवा कालरात्रि कहा जाता है। काल के काल और देवों के देव महादेव के इस व्रत का विशेष महत्व है। एक मतानुसार इस दिन को शिव विवाह के रुप में भी मनाया जाता है। ईशान संहिता के अनुसार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को अद्र्धरात्रि के समय करोड़ों सूर्य के तेज के समान ज्योर्तिलिंग का प्रादुर्भाव हुआ था। स्कंद पुराण के अनुसार-चाहे सागर सूख जाए, हिमालय टूट जाए, पर्वत विचलित हो जाएं परंतु शिव-व्रत कभी निष्फल नहीं जाता। भगवान राम भी यह व्रत रख चुके हैं। व्रत की परंपरा
} मेष : गुलाल से शिवजी की पूजा करें साथ में शिवरात्रि के दिन ऊँ ममलेश्वाराय नम: मंत्र का जाप करें। वृषभ : दूध से शिवजी का अभिषेक करें और नागेश्वराय नम: मंत्र का जाप करें। मिथुन : गन्ने के रस से शिवजी का अभिषेक करें और भुतेश्वराय नम: मंत्र का जाप करें। कर्क : पंचामृत से शिवजी का अभिषेक करें और महादेव के द्वादश नाम का स्मरण करें। सिंह : शहद से शिवजी का अभिषेक करें और नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। कन्या : शुद्ध जल से शिवजी का अभिषेक करें और शिव चालीसा का पाठ करें। तुला : दही से शिवजी का अभिषेक करें और शांति से शिवाष्टक का पाठ करें। वृश्चिक : दूध और घी से शिवजी का अभिषेक करें और अन्गारेश्वराय नम: मंत्र का जाप करें। धनु : दूध से शिवजी का अभिषेक करें और समेश्वरायनम: मंत्र का जाप करें। मकर : अनार से शिवजी का अभिषेक करें और शिव सहस्त्रनाम का उच्चारण करें। कुम्भ : दूध, दही, शक्कर, घी, शहद सभी से अलग अलग शिवजी का अभिषेक करें और शिवाय नम: मंत्र का जाप करें। मीन : ऋतुफल (जो मौसम का खास फल हों) से शिवजी का अभिषेक करें और भामेश्वराय नम: मंत्र का जाप करें।
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