शिक्षक की उपयोगिता

प्रफुल्ल सक्सैना-जयपुर
शिक्षक सिर्फ वह नहीं होते जो किसी स्कूल या कॉलेज में पढ़ाते हैं। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि हर इंसान भी शिक्षक का दर्जा नहीं पा सकता क्योंकि, शिक्षक का काम सिर्फ ज्ञान देना नहीं होता और यह काम तो हर कोई करता है। अपितु एक शिक्षक वो होता है जिससे आप जीवन के कदम कदम पर कुछ न कुछ सीखते हैं। क्यूंकि अगर वो शिक्षक होगा तो अपनी बात आप को समझा ही देगा और आप आखिरकार कुछ अच्छा सीख ही जाएंगे।
एक शिक्षक ही है जो यह बताता है कि रेगिस्तान में फंस जाने पर नागफनी के पेड़ को काटकर पानी पिया जा सकता है। वरना काफी लोगों में भ्रम है कि मरे ऊंट के कूबड़ में से भी पानी पिया जा सकता है। जिंदगी में मनुष्य को अक्सर भ्रम होता है जब उसे यह नहीं समझ आता कि जो हो रहा है या जो दिखाई दे रहा है वह सच है या भ्रम। ठीक मृग मरीचिका की तरह। जहां मृग मरीचिका में पास जाने पर वास्तविकता का पता चल जाता है असल जीवन में हमें शिक्षक की जरूरत होती है जो बता सके की क्या सच है और क्या झूठ। एक गंदे साबुन को दूसरे साबुन से नहीं धोया जा सकता। यह भी हो सकता है कि साफ सुधरा साबुन भी गंदा हो जाये। लेकिन उसका इस्तेमाल बंद करके हम गंदगी से बच सकते हैं। यूं मान लीजिये गंदे और साफ साबुन के बीच का फर्क हमें एक शिक्षक ही बता सकता है।
जरा सोचकर देखिये शिक्षक की मनोदशा, एक शिक्षक जीवनभर बच्चों को पढ़ाता है। बच्चे जब बड़े हो जाते हैं तो पढ़ाई के बाद अपने जीवन में लग जाते हैं और नए बच्चे शिक्षक के पास आ जाते हैं और इस तरह यह क्रम चलता रहता है। मतलब एक शिक्षक जीवन भर समान उम्र के बच्चों को पढ़ाता है। फलत: शिक्षक और उसके विद्यार्थी के बीच एक उम्र का अंतर हमेशा ही रहता है। क्यूंकि शिक्षक की उम्र तो निरंतर बढ़ती ही रहेगी। लेकिन फिर भी शिक्षक उम्र के फासले को दरकिनार कर विद्यार्थी को शिक्षा देने में सफल हो ही जाता है।
अच्छे शिक्षक बनना हर किसी के हाथ में नहीं लेकिन अच्छे शिष्य या विद्यार्थी तो बन सकते हैं। कम से कम कोशिश तो कर ही सकते हैं। यूं तो संजय स्वाभाव से विनम्र थे, महर्षि व्यास के शिष्य भी थे लेकिन उनकी भूमिका सिर्फ युद्ध का हाल बताने तक सीमित रही। गौर करने वाली बात यह है कि अर्जुन के अलावा सिर्फ संजय ने सिर्फ कृष्ण का विराट स्वरूप देखा था। गीता का उपदेश उन्होंने भी सुना और उसको अपने जीवन में अपनाया।
आइये प्रण लें कि अच्छे श्रोता और अच्छे विद्यार्थी बनकर अच्छे विचारों को अपनाएं और जीवन में मिलने वाले तमाम शिक्षकों का सम्मान करें।

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