दिया कि मन्दिर की घंटी बजाने से उसकी टन-टन की आवाज़ से आस-पास के बैक्टीरिया मर जाते हैं तो जितने भी श्रदालु मन्दिर में घंटी बजाते हैं असल में वह बैक्टीरिया का बध कर रहे होते हैं।
} मन्दिर हाल में प्रवेश करते ही द्वार पाल की वाई ओर काले श्याम रंग में भव्य वस्त्र गृहन किए हुए गरूड़ जी की प्रतिभा शोभनीय है। बिल्कुल सामने आध्यात्मिक रौशनियां में भगवान प्रतिमाएं-भगवान श्री गणेश, दुर्गा, गायत्री, राधा कृष्ण, शिव परिवार, पंचमुखी हनूमान, वेक्टेश्वर स्वामी, राम लक्ष्मण दरवार आदि भगवान की प्रतिमाएं आध्यात्मिक भव्य वस्त्रों में शोभनीय हैं। जिनके दर्शन से चित्त, दृश्य, आत्मा, आनंद की संसिक्तता में प्रवेश करती है। अन्तरात्मा के निभृत एकामत के सत्य के साथ अंतरंग और नितांत वैयतिक साहचर्य का सम्मूर्तन होता है। भगवान के यथार्थ सौंदर्य के दर्शन नयी जीवन दृष्टि भर देता है। इन प्रतिमाओं के दरवार के साथ दाईं-वांई ओर भगवान मूर्तियां और भी सुशोभित है। मन्दिर में माथा टेकने के पश्चात सभी भक्तों को अंजलि में अमृत प्रसाद दिया जाता है तथा मौजूद अन्य प्रसाद दिए जाते हैं। मन्दिर हाल में दीवारों के साथ-साथ कुर्सियां रखी हुई हैं यहां वृद्ध लोग बैठ सकते हैं। भीतरी छत का डिजाईन शीशे नुमां है जिस रौशन भीतर प्रवेश करती है। छत के ऊपर गुवंद सुशोभित है। यहां हिन्दू धर्म सभी व्रत- त्यौहार मनाए जाते हैं विशेष तौर पर महा शिवरात्रि, नवरात्रे, होली, जन्माष्टमी, गणेष चतुर्थी, करवा चौथ, दीवाली तथा वर्ष में एक बार जागरण किया जाता है। जिस में भारत के प्रसिद्ध जागरण गायक बुलाए जाते हैं। यहां अनुराधा पौंढवाल, जसपिन्दर नरूला तथा स्वः नरेन्दर चंचल आदि आ चुके हैं। विशेष तौर पर राम लीला तथा दशहरा धूम धाम एंव श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। डब्ल स्टोरी मन्दिर में सात सौ से एक एक संगत के लिए लंगर हाल हैं। किचन, डायनिंग हाल लगभग चार सुविधाजनक कमरे हैं। वैदिक परम्परा की मर्यादा के सभी कार्य किए जाते हैं। विशेष तौर पर गोरखपुर से प्रकाशित होता कल्याण मैगजीन (कल्याण पत्रिका) के सभी अंक मौजूद हैं, जिनसे प्रवचन, कथाएं, व्याध्यान, सुक्तियों का प्रयोग किया जाता है। रविवार को लगभग एक हजार श्रद्धालुओं के लिए भोजन की अवस्था होती है। रविवार को ग्यारह से बारह बजे (सुबह) धार्मिक प्रवचन-भजन होते हैं। आरती सुबह आठ बजे और शाम को सात बजे। मन्दिर खुलने का समय सोमवार से शुक्रवार सुबह सात से एक बजे और चार से आठ बजे तक। शरिवार सात से दो बजे तथा चार से 8 बजे। रविवार को सुबह सात से शाम सात बजे। इस मन्दिर की सोसायटी के अध्यक्ष सर्व श्री अरविंद ऐरी, सचिव राम ऐरी, धर्मेन्दर शर्मा, चन्द्र मिततल तथा राजेन्दर चंदन आदि हैं। आखिर में श्री पंकज दीक्षित जी से संदेश में कहा कि मातृ भूमि से दूर रह कर भी अपनी सांस्कृति, संस्कृति की मर्यादा से जुड़े रहें। विदेशों में रह कर भी जिजीविषा (जिजीविषा) के साथ-साथ अपनी धर्म संस्कृति से जुड़ना ही देश भक्ति है।
#container बलविन्दर बालम गुरदासपुर ओंकार नगर गुरदासपुर (पंजाब) एडमिंटन, कनेडा, 91-9815625409
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