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शहीद स्मृति चेतना समिति ने राज त्रिपाठी को ‘राष्ट्रीय संचेतना सम्मान’ से सम्मानित किया

नई दिल्ली। शहीद स्मृति चेतना समिति ने अपना सबसे बड़ा सम्मान ‘राष्ट्रीय संचेतना सम्मान’ श्रीमान राज त्रिपाठी को दिया, जो बेवर मैनपुरी, उत्तर प्रदेश में में शहीद मंदिर और शहीद मेला के संस्थापक हैं। राज त्रिपाठी स्वतंत्र सेनानी के सुपुत्र हैं और राष्ट्रीय संचेतना के संवाहक हैं। राष्ट्रीय संचेतना सम्मान के लिए राज त्रिपाठी का चयन पूरे भारतवर्ष के देशभक्तों के बीच में किया गया और यह पुरस्कार समिति के अध्यक्ष सी.ए. सुरेश गुप्ता और समिति के वर्तमान संस्थापक प्रेम कुमार शुक्ल तथा पूर्व अध्यक्ष सेठ रामनिवास गुप्ता, समिति के महासचिव देवी दत्त सजल, उपाध्यक्ष हरीश ग्रोवर, कोषाध्यक्ष योगेश कुमार सिंह, पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. बी.के. चंद्र सखी, कविवर दीपक वाष्र्णेय की उपस्थिति में शहीद स्मृति चेतना समिति की ओर से यह सम्मान दिया गया। इस अवसर पर राज त्रिपाठी ने कहा जो शहीद मेला बेवर मैनपुरी में लगता है वह शहीद मेला दिल्ली में लगेगा जिसमें प्रमुख भूमिका शहीद स्मृति चेतना समिति की होगी। इस अवसर पर समिति के वर्तमान संस्थापक प्रेम कुमार शुक्ल ने कहा आज जरूरत है इस तरह के मेले जगह-जगह दिल्ली में और पूरे देश में लगाए जाएं। सम्मान समारोह में शहीद स्मृति चेतना समिति के अध्यक्ष सीए सुरेश गुप्ता ने कहा यह समिति के लिए बड़े हर्ष का विषय होगा कि इस तरह के मेले लगाने में हमारी समिति मुख्य रूप से सहयोग करेगी रामनिवास गुप्ता ने शेरो शायरी करके सभी का मन मोह लिया देवीधर सजल ने भी शेर प्रसिद्ध अंदाज में नेता की कविता सुनाइ, दीपक वाष्र्णेय ने संवेदना के कुछ बंद प्रस्तुत किए हरीश ग्रोवर ने भी शेरो शायरी का जवाब दिया। इस अवसर पर प्रेम कुमार शुक्ल ने अपनी प्रसिद्ध कविता ‘शहीदों की चिताओं पर भला कौन है जाता, किसे फुर्सत दुनिया में मेले कौन लगाता’ सुनाई। पूरा कार्यक्रम सौहार्द पूर्ण और भविष्य के कार्यक्रमों की चिंता की गई तथा देश भक्ति कैसे लोगों में बड़े इस विषय पर विचार विमर्श हुआ। इस अवसर पर बिस्मिल की अंतिम शायरी के बोल प्रस्तुत कि डॉ. बी.के. चंद्र सखी ने माता की जय वंदे मातरम के साथ एक कार्यक्रम समाप्त हुआ और जल्द ही मिलने की बात लेकर राज त्रिपाठी अपने गंतव्य बेवर मैनपुरी के लिए प्रस्थान कर गए।

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