स्वास्थ्य

हाइपरटेंशन कहीं जानलेवा न बन जाये

हायपरटेंशन अर्थात उच्च रक्तचाप या हाई ब्लड प्रेशर वह स्थिती हैं जिसमें धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ जाता है, दबाव की इस वृद्धि के कारण, रक्त की धमनियों में रक्त का प्रवाह बनाये रखने के लिये हृदय को सामान्य से अधिक काम करने की आवश्यकता पड़ती हैं। उच्च रक्तचाप मे ब्लड प्रेशर बहुत अधिक होता है। उच्च रक्तचाप यह गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का कारण बन सकता है और हृदय रोग, स्ट्रोक और कभी-कभी मृत्यु के जोखिम को बढ़ा सकता है, यह साइलेंट किलर की तरह काम करता है। हर साल विश्व उच्च रक्तचाप दिवस 17 मई को दुनियाभर में जन जागरूकता के लिए मनाया जाता है, इस वर्ष विश्व उच्च रक्तचाप दिवस 2022 की थीम “अपने रक्तचाप को सटीक रूप से मापें, इसे नियंत्रित करें, दीर्घायु जीवन जियें” यह है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन अनुसार, उच्च रक्तचाप या हाई ब्लड प्रेशर एक गंभीर चिकित्सा स्थिति है जो हृदय, मस्तिष्क, गुर्दे और अन्य बीमारियों के जोखिम को बढ़ा देती है।  अफ्रीकी क्षेत्र में उच्च रक्तचाप (27%) का उच्चतम प्रसार है जबकि अमेरिका में उच्च रक्तचाप (18%) का प्रसार सबसे कम है। दुनिया भर में 30-79 वर्ष की आयु के अनुमानित 1.28 अरब वयस्कों को उच्च रक्तचाप है, जिनमें से अधिकांश (दो-तिहाई) निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं। उच्च रक्तचाप से ग्रस्त अनुमानित 46% वयस्क स्थिति से अनजान है। उच्च रक्तचाप वाले आधे से भी कम वयस्कों (42%) का निदान और उपचार किया जाता है। उच्च रक्तचाप से ग्रस्त 5 में से लगभग 1 वयस्क (21%) में यह नियंत्रण में होता है। उच्च रक्तचाप दुनिया भर में अकाल मृत्यु का एक प्रमुख कारण है।

लैंसेट अध्ययन के अनुसार, 2016 में भारत में कुल मौतों में हृदय रोग और स्ट्रोक ने लगभग 28.1% का योगदान दिया। हर 10 में से 3 भारतीय हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं। हाइपरटेंशन मौत और विकलांगता का चौथा सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर भी है। भारत में लगभग 20 करोड़ वयस्कों में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है। भारत दुनिया में उच्च रक्तचाप के निदान की सबसे कम दरों में से एक है। देश में 60% से 70% के बीच पुरुष और महिलाएं अपनी वास्तविक स्थिति से अनजान हैं। भारत की स्थिति 200 देशों में उच्च रक्तचाप निदान की दर में महिलाओं के लिए 193वें और पुरुषों के लिए 170 वें स्थान पर है। निदान की ऐसी निम्न स्थिति उच्च रक्तचाप की बीमारी को घातक स्तर पर पहुँचाती है, जिससे लोगों को दिल के दौरे और स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्थितियों का शिकार होना पड़ता है। भारत में, उच्च रक्तचाप के साथ रहने वाले वयस्कों (30-79 वर्ष) का प्रतिशत 1990 में 25.52% से बढ़कर 2019 में पुरुषों में 30.59% और महिलाओं में 26.53% से 29.54% हो गया, जैसा कि द लैंसेट में प्रकाशित अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन में कहा गया है।

भारत में उच्च रक्तचाप का समय पर पता लगाने और बेहतर उपचार से हृदय सम्बंधित रोगों का बोझ कम हो जाएगा। यह अनुमान लगाया गया है कि भारत में सिस्टोलिक रक्तचाप में 2 मिमी की व्यापक कमी, कोरोनरी धमनी की बीमारी के कारण 151,000 मौतों को रोकेगी और स्ट्रोक के कारण 153,000 मौतों को रोका जा सकेगा। उच्च रक्तचाप को कम करने से दिल का दौरा, स्ट्रोक और गुर्दे की क्षति के साथ-साथ अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव होता है। इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता है जैसे :- नमक का सेवन कम करना (प्रतिदिन 5 ग्राम से कम), अधिक फल और ताजी हरी, अंकुरित सब्जियां खाना, तला-भुना, पापड़, अचार, चाट-मसाला खाने पर लगाम लगाना। नियमित व्यायाम, टहलना, पैदल चलना, साइकिल चलाना, एरोबिक, तैराकी जैसे हल्के-फुल्के शारीरिक व्यायाम करना, वजन संतुलित रखना, सभी तरह के नशे से दूरी, पौष्टिक खाद्य लेना व संतृप्त वसा में उच्च खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना, अब तो  आधुनिक जीवन शैली से दूरी बनाना भी बहुत जरूरी हो गया है। उच्च रक्तचाप की समस्या होने पर चिकित्सक से इलाज करना, चिकित्सक द्वारा बताये गए दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करना, तनाव को कम करना, खुशनुमा माहौल बनाये  रखना, सकारात्मक सोच-विचार, खुद पर ग़ुस्सा हावी न होने देना, विचारशक्ति बढ़ाना, शारीरिक और मानसिक मजबूती के लिए योग करना। सबसे जरूरी है खान-पान पर उचित नियंत्रण रखना क्योंकि थोडेसे चटोरी जुबान के स्वाद के चक्कर में अपने पूरे शरीर को खराब कर तड़पा-तड़पा कर मारना और महंगी बीमारियों का शिकार होना कहां की समझदारी है, इस विषय पर गहनता से विचार करना बहुत जरुरी है।

आज भागमभाग के वातावरण में सभी लोग खुद को व्यस्थ बनाये हुए है, खाद्य मिलावट, प्रदुषण, शोर, असंस्कृत व्यवहार, प्रकृति का अतिदोहन, यांत्रिक संसाधनों का अत्यधिक उपभोग के कारण जीवन उलझनभरा हो गया है, ऐसे में अपने सेहत को संभालना बहुत जरुरी है। तनावमुक्त जीवन के द्वारा हम हाइपरटेंशन के साथ ही अनेक घातक बीमारियों से दूर रह सकते है। तनाव नियंत्रण में रखना, हमने अपने देश के नेताओं से सीखना चाहिए, नेताओं की कितनी भी उम्र हों, सत्तापक्ष या विपक्ष में हों, उनपर कितने भी गंभीर आरोप लगे हों या फिर किसी घोटाले में नाम आया हों, या किसी ने उनके लिए अपशब्द, कटुभाषा का प्रयोग किया हों, नेता हर परिस्थिति में सकारात्मक रहकर अपने धैर्य का परिचय देते हुए हमेशा आगे बढ़ते रहते है, नेता हर स्थिति में सक्षम बने रहते है, उम्मीद का दामन नहीं छोड़ते, सभी पार्टियों से संपर्क बनाये रखते है, कितनी भी व्यस्त दिनचर्या हो, वे हमेशा ऊर्जावान नजर आते है, वे सामान्य व्यक्ति की तरह छोटी-छोटी बात पर अपना आपा नहीं खोते है, ये जिंदादिली प्रत्येक मनुष्य ने सीखनी चाहिए। परोपकारी भावना और सद्गुणों को अपनाएं, समाधानी बनना सीखें, प्रकृति से जुड़े, खुश रहें, तनावमुक्त जीवन जियें।

डॉ. प्रितम भि. गेडाम

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