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कोराना वायरस के मद्देनजर ‘आप’ का पार्टी मुख्यालय जनता के लिए बंद

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) ने शुक्रवार को कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के मद्देनजर अगली सूचना तक पार्टी मुख्यालय को बंद कर दिया है।
‘आप’ के एक नेता के अनुसार, राउज एवेन्यू स्थित पार्टी मुख्यालय को अगली सूचना तक जनता के लिए बंद कर दिया गया है। नेता ने कहा कि इस अवधि के दौरान टीमें अपने घर से कार्य करेंगी।
वहीं, विदेश यात्रा करके आने वाले लोगों को क्वारंटाइन रहने का आदेश मानना ही पड़ेगा। अगर वह ऐसा नहीं करेंगे तो उनके खिलाफ महामारी एक्ट के तहत केस दर्ज कर गिरफ्तारी की जाएगी। देशभर से क्वारंटाइन केंद्र से भागने की खबर आने के बाद सरकार ने यह फैसला लिया है।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को कहा कि हम घर पर ही क्वारंटाइन रहने की छूट दे रहे हैं। लेकिन, अगर उसका कोई गलत फायदा उठाएगा तो उसके खिलाफ सख्ती की जाएगी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि विदेश यात्रा करके आने वाले लोगों को अपने घर पर ही क्वारंटाइन रहने की छूट दी जा रही है। मगर उसके साथ उनके हाथ पर क्वारंटाइन रहने का स्टैंप (मुहर) लगाकर घर जाने की छूट दी जा रही है, जिससे अगर वह घर से बाहर घूमते मिले तो उनकी पहचान लोग कर सकें। सरकार को जानकारी मिलती है तो उन पर कानूनी कार्रवाई होगी। सिर्फ उन्हें ही होम क्वारंटाइन की छूट मिलेगी, जिनकी प्राथमिक जांच में कोई लक्षण नहीं मिलेगा।
768 क्वारंटाइन बेड का इंतजाम किया : मुख्यमंत्री के मुताबिक, दिल्ली सरकार ने 768 क्वारंटाइन बेड का इंतजाम दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में किया है। इसमें 57 लोग क्वारंटाइन केंद्र में रह रहे हैं। 711 बेड खाली हैं। केंद्र सरकार के भी करीब इतने ही क्वारंटाइन बेड अलग हैं। हमारे पास 550 आइसोलेशन बेड हैं। यह संदिग्ध मरीजों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इसमें अभी कुल 40 मरीज यहां हैं। केंद्र सरकार के अस्पतालों में 95 बिस्तर वाला आइसोलेशन वार्ड है। उसमें 67 संदिग्ध मरीज रह रहे हैं।

महामारी एक्ट के तहत कार्रवाई होगी

केजरीवाल ने कहा कै कि अगर कोई क्वारंटाइन रहने का आदेश नहीं मानता है तो उस पर दिल्ली में लागू महामारी एक्ट 1897 के तहत कार्रवाई होगी। एक्ट के तहत अगर कोई सरकार के इस आदेश को नहीं मानता है तो उस पर केस दर्ज कर कार्रवाई होती है। इसमें सरकार के आदेश नहीं मानने और जानकारी होने के बाद भी लापरवाही बरतना (संक्रमण फैलाना) और मानव जाति की जान का खतरा बनना जैसे मामले आते हैं। इसमें एक माह से लेकर दो साल तक की सजा का प्रावधान है। साभार: हिन्दुस्तान टाइम्स

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