राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत हर बच्चे को नि:शुल्क शिक्षा का प्रावधान करे सरकार : परमजीत सिंह पम्मा

नई दिल्ली। बच्चों के शिक्षा अधिकार के लिए नेशनल अकाली दल एक मुहिम चलाने जा रहा है जिसमें राइट टू एजुकेशन एक्ट की जानकारी आम लोगों तक पहुंच जाएगा यह जानकारी दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने केंद्र व राज्य सरकारों से राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत सभी बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने की करेगा। उन्होंने कोरोना काल में फीस ना भरने वाले बच्चों को इस एक्ट के तहत राहत देने की मांग की है उनका कहना है सरकार की जिम्मेदारी हर बच्चे को नि:शुल्क शिक्षा देने की जिम्मेदारी है और बच्चों को शिक्षा पाने का अधिकार।
श्री पम्मा ने कहां के राइट टू एजुकेशन एक्ट बनाने का उद्देश्य हर बच्चे को शिक्षित करना था इतना ही नहीं यह हर बच्चे का अधिकार है की वह शिक्षा प्राप्त करें बड़े दुख की बात है राइट टू एजुकेशन एक्ट बना तो दिया गया लेकिन उसे सही ढंग से अमल नहीं किया जा रहा जिससे आज भी छोटे-छोटे बच्चे शिक्षित नहीं हो रहे और शिक्षा से वंचित हैं
उन्होंने कहा पिछले मार्च माह से देश ही नहीं विश्व भी कोरोना जैसी खतरनाक बीमारी से पीड़ित है करोड़ों लोग बेरोजगार हो चुके हैं घर चलाने के लिए लोगों के पास पैसे नहीं है। ऐसे में वह लोग स्कूलों की मोटी-मोटी फीस कैसे भरें यह ठीक है कि स्कूल ऑनलाइन शिक्षा दे रहे हैं लेकिन ऑनलाइन शिक्षा भी पूरी तरह नहीं मिल पाती इसकी आड़ में स्कूल प्रबंधक अभिभावकों को फीस भरने के लिए मजबूर कर रहे हैं या फिर उनसे अपने बच्चों को घर बैठाने की धमकियां दे रहे हैं। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी बन जाती है कि वह हर बच्चे को शिक्षित बनाए।
श्री पम्मा ने कहा की जिस प्रकार सरकार बेरोजगारी के लिए या बड़े.बड़े उद्योगपतियों को राहत के पैकेज की घोषणा कर रही है ऐसे में बच्चों की शिक्षा के लिए भी राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत सभी को नि:शुल्क शिक्षा की भी घोषणा करनी चाहिए सरकार को आगे आकर बच्चों की फीस सरकारी खर्च पर भरनी चाहिए हर बच्चा देश की धरोहर है यदि बच्चे पढ़ेंगे तभी देश तरक्की करेगा।
श्री पम्मा ने सरकार से इस एक्ट के तहत निजी स्कूलों को भी नि:शुल्क शिक्षा देने का निर्देश देने का आग्रह किया है उन्होंने कहा कि यदि हर बच्चे को शिक्षा नहीं मिल पा रही तो ऐसे में राइट टू एजुकेशन एक्ट का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से भी आग्रह किया है इस मामले में संज्ञान लेकर केंद्र व राज्य सरकारों को इस एक्ट के तहत हर बच्चे की शिक्षा का उचित प्रबंध करने का निर्देश देने का आग्रह किया है ताकि बच्चों व उनके अभिभावकों को राहत मिल सके।

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